सच्चा मित्र
मित्र गंगा की पवित्र निर्मल धार सा,
मित्र “आनंद” के अनंत भंडार सा,
मित्र तेजस्वी चमकती तलवार सा,
मित्र खुशियों की मनोहर झंकार सा ।
मित्र भावों के अमृत रसधार सा,
मित्र ईश्वर के अनन्य उपकार सा,
मित्र गले में महकते पुष्प हार सा,
मित्र जीवन के शुभ संस्कार सा ।
मित्र मुश्किलों में चमत्कार सा,
मित्र गमों में खड़ी सुरक्षित दीवार सा,
मित्र उलझनों में स्वर्णकार सा,
मित्र आपदाओं में सच्चे मददगार सा ।
मित्र तूफानों में पार लगाती पतवार सा,
मित्र परिक्षाओं में श्रेष्ठतम पुरस्कार सा,
मित्र उत्तम कर्मों के मिले अविष्कार सा,
मित्र ईश से प्राप्त उच्चतम उपहार सा ।
मित्र अंधेरे में दीपक चमकदार सा,
मित्र जीवन बगिया में गुलबहार सा,
मित्र प्रार्थनाओं में मंगलाचार सा,
मित्र विराने में उत्कृष्ट संगीतकार सा ।
मित्र सुख के अद्वितीय संसार सा,
मित्र कशमकश में सच्ची सलाहकार सा,
मित्र रिश्तों में जागृत प्रेम सदाबहार सा,
मित्र चाहतों में दिव्य रंगत इज़हार सा ।
— मोनिका डागा “आनंद”
