कुण्डली/छंद

रिश्ता यह अनमोल

आई बहना नेह ले, बाँधे रेशम डोर।

मंगल हिय शुभ भावना, नाच रहा मन मोर।।

नाच रहा मन मोर, भाल शुभ तिलक लगाएं।

रोली कुमकुम थाल, करे आरत हरषाएं।।

पीहर की सौगात, प्रेम से रहना भाई।

भरा रहे भंडार, दुआयें लेकर आई।।

भाई बहना नेह का, है राखी त्यौहार। 

मंगल पावन पर्व हैं, बंधन में हैं प्यार।।

बंधन में हैं प्यार, बंदगी सबको प्यारी।

रिश्ता यह अनमोल, प्रेम से सिंचित क्यारी।।

पीहर से है मोह, दुआएँ  भरभर लाई।

मन में है विश्वास, साथ है मेरे  भाई।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८