गीत/नवगीत

प्रभु आकर पार लगाओ

जीवन नैया डूब रही प्रभु आकर पार लगाओ
कठिन समय है राह न सूझे आकर राह दिखाओ

शूल पांव में गड़े हुए हैं तूफानों ने घेरा
अंधियारे पथ रोक रहे हैं दूर बहुत है डेरा
हरो प्रभु बाधाएँ मेरी आस का दीप जलाओ
कठिन समय है राह न सूझे आकर राह दिखाओ

साथ छोड़ सब चले गए हैं राह के साथी सारे
सभी तमाशा देख सोचते आखिर कब यह हारे
तुम कान्हा मैं बनू सुदामा मेरे कष्ट मिटाओ
कठिन समय है राह न सूझे आकर राह दिखाओ

घोर निराशा के बादल हैं नीर आँख से बहते
जख्म दिए लोगों ने गहरे आखिर कितना सहते
दूर करो पीड़ाएं प्रभु जी मरहम कोई लगाओ
कठिन समय है राह न सूझे आकर राह दिखाओ

— शालिनी शर्मा

शालिनी शर्मा

पिता का नाम-स्वर्गीय मथुरा प्रसाद दीक्षित माता का नाम -श्रीमती ममता दीक्षित पति का नाम-श्री अनिल कुमार शर्मा वर्तमान स्थायी पता- केऐ-16 कर्पूरी पुरम गाजियाबाद फोन न0- 9871631138 जन्म एंव जन्म स्थान-09.04.1969, परीक्षित गढ़ गाजियाबाद उप्र शिक्षा एवं व्यवसाय-बीएससी बीएड़,अध्यापिका व सहायक NCC आफिसर (13 यूपी गर्ल्स बटालियन) प्रकाशित रचनाएं एवं विवरण-अमर उजाला काव्य में 48 रचनायें प्रकाशित, विभिन्न पत्रिकाओं में रोज रजनाएं प्रकाशित होती हैं,दो तीन सम्मान प्राप्त