प्रभु आकर पार लगाओ
जीवन नैया डूब रही प्रभु आकर पार लगाओ
कठिन समय है राह न सूझे आकर राह दिखाओ
शूल पांव में गड़े हुए हैं तूफानों ने घेरा
अंधियारे पथ रोक रहे हैं दूर बहुत है डेरा
हरो प्रभु बाधाएँ मेरी आस का दीप जलाओ
कठिन समय है राह न सूझे आकर राह दिखाओ
साथ छोड़ सब चले गए हैं राह के साथी सारे
सभी तमाशा देख सोचते आखिर कब यह हारे
तुम कान्हा मैं बनू सुदामा मेरे कष्ट मिटाओ
कठिन समय है राह न सूझे आकर राह दिखाओ
घोर निराशा के बादल हैं नीर आँख से बहते
जख्म दिए लोगों ने गहरे आखिर कितना सहते
दूर करो पीड़ाएं प्रभु जी मरहम कोई लगाओ
कठिन समय है राह न सूझे आकर राह दिखाओ
— शालिनी शर्मा
