मन के जीते जीत है
मत करना विश्राम मन, नहीं माँगना छूट ,
सभी लूटते देश को , तू भी जम कर लूट।
सरहद पर तैनात हैं, उनको ये पैगाम ,
दुश्मन सोए या जगे, मत करना विश्राम।
खून के रिश्ते से बड़े, होते दिल के यार ,
जिनसे अपनापन मिले, और संजोए प्यार।
जो डर से डरता रहा, वह डर का है दास,
डर के आगे जीत का, उसे नहीं विश्वास।
मन के जीते जीत है, मन के हारे हार,
मन से जो कोशिश करें, ना मानें वो हार।
— महेंद्र कुमार वर्मा
