हाइटेक जानवर
आखिर क्यूँ ये लहू ज़मीं पे बहाया गया,
अबला थी, उसको ज़हर से खिलाया गया।
चुप रहे दरिंदे, चुप रही बस्ती, मगर
उसका क़ातिल खुलेआम घूमाया गया।
माँ की आँखों में सूखा एक समंदर है,
पिता के दुख का भी मज़ाक़ उड़ाया गया।
देश का क़ानून कहता है सब बराबर हैं,
पर ग़रीब को ही हमेशा सताया गया।
आजकल जानवर भी हाइटेक हो गए हैं,
चाकू-छुरी से शिकार को गिराया गया।
मजलूम लाशों की चीखें गवाही देती हैं,
इंसाफ़ का सूरज अभी न उगाया गया।
‘सौरभ’ ये पूछे ख़ुदा से दुआओं में,
क्यों मासूम का सपना यूँ मिटाया गया।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
