पर्यावरण

कौआ पक्षी भी इंसान की बोली बोलता

महाराष्ट्र के पालघर में एक पालतू कौआ इंसान की बोली मराठी बोली में आई,बाबा जैसे वाक्यांश बोलता है।इसके अलावा वो मराठी भी समझता है कि सामने वाला क्या कह रहा है।उसका वीडियो वायरल हो चुका है।कोई भी पक्षी इंसान के संरक्षण में रहता है तो वो इंसानी बोली समझने लगता है।ओर बोलने की कोशिश भी करता है।मान्यता है कि कौआ पूर्वजों का प्रतीक होते है।श्राद्ध पक्ष के दौरान इन्हें जो खाने को अर्पण किया जाता है।वो पूर्वजों तक पहुँचता है।श्राद्ध पक्ष में इनका महत्व है।विगत वर्ष सायरन की नकल कर पक्षी ने पुलिस को किया भ्रमित खबर ने अचंभित कर दिया था।।ब्रिटेन में एक पक्षी ने सायरन की हूबहू आवाज की नकल स्टर्लिंग पक्षी ने कर लोगों को अचंभित कर दिया।पक्षी की बात करें तो मप्र में मैना की खासियत होती है कि ये इंसानों की बोली कि हूबहू नकल उतारती है। विलुप्त प्रजातियों के पक्षियों को बचाने के प्रयास किये जाना चाहिए क्योंकि धरती पर जितना अधिकार इंसानों का है उतना ही पशु-पक्षियों और जीव जंतुओं का भी है।

— संजय वर्मा “दृष्टि”

*संजय वर्मा 'दृष्टि'

पूरा नाम:- संजय वर्मा "दॄष्टि " 2-पिता का नाम:- श्री शांतीलालजी वर्मा 3-वर्तमान/स्थायी पता "-125 शहीद भगत सिंग मार्ग मनावर जिला -धार ( म प्र ) 454446 4-फोन नं/वाटस एप नं/ई मेल:- 07294 233656 /9893070756 /antriksh.sanjay@gmail.com 5-शिक्षा/जन्म तिथि- आय टी आय / 2-5-1962 (उज्जैन ) 6-व्यवसाय:- ड़ी एम (जल संसाधन विभाग ) 7-प्रकाशन विवरण .प्रकाशन - देश -विदेश की विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं में रचनाएँ व् समाचार पत्रों में निरंतर रचनाओं और पत्र का प्रकाशन ,प्रकाशित काव्य कृति "दरवाजे पर दस्तक " खट्टे मीठे रिश्ते उपन्यास कनाडा -अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व के 65 रचनाकारों में लेखनीयता में सहभागिता भारत की और से सम्मान-2015 /अनेक साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित -संस्थाओं से सम्बद्धता ):-शब्दप्रवाह उज्जैन ,यशधारा - धार, लघूकथा संस्था जबलपुर में उप संपादक -काव्य मंच/आकाशवाणी/ पर काव्य पाठ :-शगुन काव्य मंच