नन्हे कदम, बड़े सपने
नन्हे-नन्हे कदम बढ़ें, सपनों की ओर,
हर दिन नया सूरज, हर रात नये चोर।
बारिश की बूँदों में कागज़ की कश्ती,
तारों से बातें, चाँदनी की बस्ती।
रंग-बिरंगी तितली, फूलों की बात,
हँसते-खिलखिलाते बचपन की बारात।
आसमान से बातें, धरती से दोस्ती,
खेल-खेल में कर लें पूरी हर मुराद।
छोटे-छोटे हाथों में बड़े-बड़े अरमान,
पर्वत भी झुक जाए, हो ऐसा इम्तहान।
माँ की लोरी, दादी की कहानी,
खुशियों से भरी हो हर बचपन की रवानी।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
