गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

बेरुखी से मेरी खफा होगा।
नाम दीवारों पर लिखा होगा।।

आँख भी भर गयी होगी उसकी।
जब मुहब्बत में दिल टूटा होगा।।

नींद भी उड़ गयी होगी उसकी।
याद करके मेरी जगा होगा।।

देखकर खत पुराने वो यारों।
आग में इश्क की जला होगा।।

मौत से रूबरू हुआ होगा।
धड़कनों का अर्थ पता होगा।।

जिन्दगी का सफर बड़ा मुश्किल।
फिर भी दुश्मन से जीतना होगा।।

— प्रीती श्रीवास्तव

प्रीती श्रीवास्तव

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