कविता

गुरु को प्रणाम

मेरा गुरु मेरे लिए पूज्यनीय है ,
खुद से भी ज्यादा आदरणीय है ।
जिसने दिया मुझे अनमोल ज्ञान ,
वो ज्ञानी मेरे लिए है सबसे महान ।

मेरे गुरु ने मुझे भविष्य की राह दिखाया है ,
कँटीले रास्ते में भी शान से चलना सिखाया है ।
मेरे जीवन से जिसने अंधकार को दूर किया है ,
जिसने मेरे मस्तिष्क को ज्ञान से भर दिया है ।

प्रणाम उनके चरणों में जिसने मुझे तालिम दी ,
जिनके कृपादृष्टि से मैंने विद्या हासिल की ।
वो मेरे जीवन का नित्य पथ प्रदर्शक है ,
वो मेरे जीवन का एक मार्गदर्शक है ।

उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन ,
प्रफुल्लित मन से हार्दिक अभिनंदन ।
गुरु-शिष्य का ये पवित्र नाता अमर रहे ,
पूरा संसार शिक्षक दिवस मनाता रहे ।

— हितेश्वर बर्मन ‘चैतन्य’

हितेश्वर बर्मन चैतन्य

डंगनिया (कोसीर), सारंगढ़ , छत्तीसगढ़ email - hiteshwarbarman87@gmail.com