मखमल की झुर्रियाँ
मखमल की झुर्रियाँ,
वक्त की स्याही से लिखी,
हर सिलवट में बसती हैं,
अनकही दास्तानों की छवि।
ये उम्र की नहीं,
सिर्फ बीते लम्हों की गवाही हैं,
जहाँ हर सिलवट के पीछे,
हज़ार एहसासों की परछाईं हैं।
सफ़ेद बालों की तरह,
ये भी एक मुकम्मल कहानी हैं,
जिसमें हर खामोशी,
एक नयी ग़ज़ल सुनाती है।
बेबसी नहीं, ये तो
उस मखमली अहसास का रेशम है,
जो समय की सलाइयों से बुना गया,
और ख़ुद से प्यार की नर्माई से सना गया।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
