गीत/नवगीत

आजकल चिट्ठियां नहीं आती

क्यों करते हो इंतज़ार दहलीज़ पर साथी
छोड़ दो पुरानी बातें अब ये काम नहीं आती
जानते हो आजकल चिट्ठियां नहीं आती।

बच्चे विदेश से हमें फोन पर दो बातें कह लेंगे
उन्हें कैसे सहेजेंगे चिट्ठी की तरह वो न समझेंगे
उनको समय और कहीं यादें नहीं तड़पाती।
छोड़ दो इंतज़ार आजकल चिट्ठियां नहीं आती।

अच्छा तो है कि आमने-सामने बात हो जाती
कभी कभी उनकी सूरत भी तो है दिख जाती
कितने डालर भेजें पर हमें न जाने ये बातें भाती
हां, माना कि आजकल चिट्ठियां नहीं आती।

पहले के दौर और थे जानते हैं ये हम सभी
पर रिश्तों में कशिश और सच्चाई सी थी कहीं
अब बस औपचारिकता सी हमें है दिख पाती।
इसलिए शायद आजकल चिट्ठियां नहीं आती।

समय नहीं है बहुत काम हैं आजकल सबके
एक फोन‌ से सभी रिश्ते मानों बंधें हो उनके
शायद अब अपनों को यही भाषा समझ आती‌।
इसलिए शायद आजकल चिट्ठियां नहीं आती।

— कामनी गुप्ता

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |