मेरा शहर
क्या तारीफ करूँ मैं अपने शहर की
मेरे शहर का है अद्बुत नज़ारा
पहाड़ों के बीच बसा शहर घुमारवीं
सीर गंगा का है किनारा
हाइवे बीच में से गुजरता
लोगों के लगे रहते हैं मेले
कोई परिवार दोस्तों संग आता यहां
मौज करता है कोई अकेले
अस्पताल स्कूल कॉलेज सब हैं यहां
यह वो शहर हर चीज़ मिलती जहां
ब्यापारिक गतिविधियां रोजगार से
कईयाँ की जिंदगी की फुलवारी खिलती यहां
सीर गंगा के किनारे यहां लगता है मेला
रौनक लगती है दुकाने हैं सजाते
लोग बहुत आनंद मनाते हैं
शाम ढले लौट कर घर को हैं जाते
हर गली हर रास्ता रौशनी से है नहाया
हमने अपने शहर को बहुत है चमकाया
साफ सफाई का रखा जाता है विशेष ध्यान
हर गली नुक्कड़ पर कूड़ेदान है लगाया
सोहणी देवी बाबा बसदी की होती जय जयकार
कृपा उनकी होती है करते हैं हम पर उपकार
मेले का आनंद लेते है दूर दूर से आकर
प्रहरी बन कर हैं खड़ी सोहणी देवी तियून सरयून छन्जयार की धार
अब तो मनाली किरतपुर फोरलेन भी है बिल्कुल पास
लम्बा सफर होता था पहले हो जाते थे उदास
रेल भी धीरे धीरे पहुंच रही जिला मुख्यालय बिलासपुर
गोविंद सागर में जब पिलरों पर से गुजरेगी बन जाएगी खास
घुमारवीं हिमाचल के केंद्र में है बसता
सभी सुविधाएं यहां हैं भरपूर
मेरा शहर है सच में बहुत सुंदर
कभी आप भी यहां तशरीफ लाएं जरूर
— रवींद्र कुमार शर्मा
