कविता

कविता

एक पल में सुख लगता है
अगले ही पल दुखों का मेला है
ये जीवन क्या है कौन जान पाया
संघर्षों का लगता यहाँ रेला है

रात का सन्नाटा अक्सर रुला देता है
जब अतीत खुद को दोहराता है
सिसकियाँ मुँह दबाकर रोती हैं
जाने क्या क्या नसीब दिखलाता है

सुना है अक्सर लोगों से मैंने
तुम्हारा सुखों से करीबी नाता है
क्या क्या बतलायें हम उनको
जिंदगी सुखों का नहीं दुख का खाता है

झूठी खुशियों की खातिर जाने क्यों
हम मीठी-मीठी बातों में आ जाते हैं
भुलाकर कड़वे सत्य को अक्सर कि
कोई नहीं यहाँ किसी का सिर्फ दिखावा है

दुनिया कुछ भी तो नहीं सिवा नाटक के
एक स्वप्न छलावा है सागर है इच्छाओं का
त्याग कर उम्मीदों को इस झूठे दौर में
सत्य की नाव में दूर पार उतर जाना है

— वर्षा वार्ष्णेय

*वर्षा वार्ष्णेय

पति का नाम –श्री गणेश कुमार वार्ष्णेय शिक्षा –ग्रेजुएशन {साहित्यिक अंग्रेजी ,सामान्य अंग्रेजी ,अर्थशास्त्र ,मनोविज्ञान } पता –संगम बिहार कॉलोनी ,गली न .3 नगला तिकोना रोड अलीगढ़{उत्तर प्रदेश} फ़ोन न .. 8868881051, 8439939877 अन्य – समाचार पत्र और किताबों में सामाजिक कुरीतियों और ज्वलंत विषयों पर काव्य सृजन और लेख , पूर्व में अध्यापन कार्य, वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन यही है जिंदगी, कविता संग्रह की लेखिका नारी गौरव सम्मान से सम्मानित पुष्पगंधा काव्य संकलन के लिए रचनाकार के लिए सम्मानित {भारत की प्रतिभाशाली हिंदी कवयित्रियाँ }साझा संकलन पुष्पगंधा काव्य संकलन साझा संकलन संदल सुगंध साझा संकलन Pride of women award -2017 Indian trailblezer women Award 2017