लघुकथा

वह शख्स

वह शख्स चला गया ! जिसकी किसी को जरुरत नहीं, जिसका होना सभी को खटकता था । किसी को परेशान न करनेवाला सबके परेशानी का कारण था खासकर अपनो की।
गिरधारी प्रसाद एक बहुत ही सादा तबियत के सरल व्यक्ति थे ,लेकिन उनकी जिंदगी के सघष॔ उन्हे खास बनाती है ।चार बेटे और दो बेटियों से भरा परिवार लेकिन वो नितांत अकेले !
जीवन संगनी का निधन काफी पहले हो गया था।अकेले ही उन्होने अपने सारे कर्तव्य पूरे किये लेकिन उनके अधिकार कोई न थे । जैसे ही सारे बच्चे सेटल हुए सभी ने उनको किस्मत के सहारे छोड़ दिया किसी की जिंदगी में उनकी रत्तीभर जगह नहीं थी ।
पहाड़ जैसी विशाल शख्सियत धैर्य का जैसे खजाना था उनके पास। किसी भी परेशानी से विचलित होते कभी नहीं देखा ।निराशावादी भाव ने कभी उन्हे छूआ ही नहीं ।
मुझे इस बात से बड़ी हैरानी होती थी कि कभी भी किसी के लिए बुरा या अपमानजनक शब्दो का प्रयोग नही करते थे ।
मैं अक्सर उनसे पूछा करती थी “आपके बेटे आप की परवाह कभी नहीं करते आपको बुरा नहीं लगता ?”
” मैं अपना कर्तव्य करता हूं उनके कर्तव्य की जिम्मेदारी उनकी है।” बड़े शांतभाव से जबाव देते
गिरधारीजी की कोई बडी ख्वाहिश नहीं बस छोटी _ छोटी
अभिलाषाएं थी ।वो खाने खिलाने के बड़ शौकिन थे,नये_नये जगहो को देखने का बड़ा शौक था लेकिन उनके बेटो ने कभी भी उनके शौक को पूरा न किया ,मैं बेटो का जिक्र इसलिए कर रही हूं वो थोडे रुढिवादी थे बेटियों से मदद लेना उन्हे पसंद नहीं था लेकिन बेटियों ने उनके शौक को काफी हद तक पूरे किये ।
अपनी सोच की वजह से वो अपनी सारी ख्वाहिश बेटो से पूरा करना चाहते जो मुमकिन नहीं था ।बेटे और बहुओं को वो एक आंख न सुहाते थे ।यही दुख उनकी जिंदगी का आजाब बन गया ।
और उन्होने जिंदगी का साथ छोड दिया।

— विभा कुमारी “नीरजा”

*विभा कुमारी 'नीरजा'

शिक्षा-हिन्दी में एम ए रुचि-पेन्टिग एवम् पाक-कला वतर्मान निवास-#४७६सेक्टर १५a नोएडा U.P