कविता

जीवन के सफर में तेरी आँखें

जीवन के सफर में तेरी आँखें,
उस पल की तरह थीं बिल्कुल नई,
जब पहली बार तू सामने आई,
और मेरी साँसें थम गईं कहीं।

न वो दिन भूला, न वो शाम गई,
तेरी निगाहों से जब बात हुई,
लफ़्ज़ नहीं थे, फिर भी सब कह गया,
जो एहसास तेरी आँखों से बह गया।

तेरी आँखें… जैसे कोई राज़ हो,
जो बस मेरे लिए लिखा गया हो,
हर झलक में कुछ अपना-सा था,
हर पलक में इश्क़ सजा हुआ सा था।

तू कुछ कहती, उससे पहले ही,
तेरी नज़रों ने सब कुछ कह दिया,
जैसे बरसों से जानता हूँ तुझे,
जैसे मिलना हमारा मुक़द्दर में लिखा।

वो पहली नज़र का जादू,
आज तक दिल से उतरा नहीं,
तेरी आँखों में जो देखा उस रोज़,
उससे हसीन कोई सपना नहीं।

अब हर सुबह उसी पल से शुरू होती है,
जहाँ पहली बार तुझसे नज़र मिली थी,
और हर रात उसी ख़ामोशी में ढलती है,
जहाँ तेरी आँखों में मेरी दुनिया खिली थी।

— रूपेश कुमार

रूपेश कुमार

भौतिक विज्ञान छात्र एव युवा साहित्यकार जन्म - 10/05/1991 शिक्षा - स्नाकोतर भौतिकी , इसाई धर्म(डीपलोमा) , ए.डी.सी.ए (कम्युटर),बी.एड(फिजिकल साइंस) वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी ! प्रकाशित पुस्तक ~ *"मेरी कलम रो रही है", "कैसें बताऊँ तुझे", "मेरा भी आसमान नीला होगा", "मैं सड़क का खिलाड़ी हूँ" *(एकल संग्रह) एव अनेकों साझा संग्रह, एक अंग्रेजी मे ! विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओ मे सैकड़ो से अधिक कविता,कहानी,गजल प्रकाशित ! राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थानों से सैकड़ो से अधिक सम्मान प्राप्त ! सदस्य ~ भारतीय ज्ञानपीठ (आजीवन सदस्य) पता ~ ग्राम ~ चैनपुर  पोस्ट -चैनपुर, जिला - सीवान  पिन - 841203 (बिहार) What apps ~ 9934963293 E-mail - - rupeshkumar01991@gmail.com