रमापति महिमा अपरंपार
यह कैसी है तेरी माया।
देकर सबको तूने काया॥
करै हरवक्त तू रखवाली।
सब चलते हैं डाली डाली॥
ऐसा तूने कर डाला है –
नहीं है अत्याचार,
रमापति ! महिमा अपरम्पार।-॥१॥
अलग अलग देता है काया।
फैलाई दुनिया में माया॥
हर जगह सभी को भरमाया।
कैसा तूने खेल रचाया॥
सबकी रचना ऐसे की है –
फूल बना संसार,
रमापति ! महिमा अपरम्पार।-॥२॥
— रमेश कुमार सिंह रुद्र
