वृक्षारोपण जाग्रति
वृक्ष को लगाना बड़ा,नेक कार्य माना गया,
पुत्र के समान ध्यान,आप सब रखिए।
हरा-भरा हरियाली,सर्वत्र दिखेगा भाई,
जीव-जंतु प्राणी प्रति,कुछ ऐसा करिए।
धर्म कर्म यही माने, रोजगार यही ठानें,
सभी का सहयोग हो,ऐसा आप बनिए।
हो पर्यावरण शुद्ध,होगा सभी जन खुश,
खुशनूमा पल होगा,बना सोच चलिए॥१॥
माहौल बनेगा अच्छा,रहेगा न कोई कच्चा,
शुद्ध हवा पाने योग्य,सभी को बनाइये।
जीवन है अनमोल,आपस में मेलजोल,
जीव रक्षा अभियान, सर्वत्र चलाइये।
कस के कमर चले,मन में प्रतिज्ञा करें,
संतुलन बनाने का,फर्ज तो निभाइये।
मानव कल्याण मर्म,जीवन रक्षक कर्म,
संकल्प वृक्षारोपण,वट को लगाइये॥२॥
वृक्ष से है फल-फुल, वृक्ष से है कंद-मूल,
वृक्ष से बना सुगंध,अब तो सजाइये।
वृक्ष से है लकड़ियां,वृक्ष से है खिड़कियां,
वृक्ष से है दरवाजे,इस को बढाइये।
वृक्ष से है परिवहन,वृक्ष से है निर्वहन,
वृक्ष ही पूजा है सभी, क्यारी तो बनाइये।
वृक्ष से है जिंदगानी,वृक्ष से है रवानगी,
बढ़ाने का अवसर,आप न गवाइये॥३॥
— रमेश कुमार सिंह रुद्र
