लघुकथा

कामयाबी

आज पड़ोस में बडी चहल-पहल है मैंने उत्सुकतावश खिड़की से झाँककर देखा तो कमला दिखाई दी “आज तुम्हारे घर में बड़ी गहमागहमी है कोई खास बात है क्या ?” मैं पूछा
“हां दोनों भैया भाभी और बच्चे भी आए है ।”कमला ने कहा
“कोई खास बात है।” मैंने पूछा
“कोई खास नहीं ,आज बाबूजी का जन्मदिन है ना ” कमला ने खुश होकर कहा
“तुम्हारे घर में तो हमेशा रौनक लगी रहती है ।” गहरी सांस लेते हुए मैंने कहा
“ये तो है आंटी। मांजी और बाबूजी के साथ मैं तो बचपन से रह रही हूं इन्होने मुझे अपने बच्चे की तरह रखा ।
भैया और भाभी लोग भी बहुत अच्छे है मुझसे बहुत प्यार करते है ।”कमला ने कहा
“कमला कहां है तू “तभी अंदर से आवाज आई
“जी मांजी अभी आई ” कहकर कमला अंदर भागी
मैं सोच में पड़ गयी कन्हैयालाल कितने खुशकिस्मत है। भले ही ये छोटा कारोबार करते है इनके बच्चे भी छोटे-मोटे नौकरी करते है लेकिन ये लोग बहुत खुशहाल है ।
एक हम दोनो है सालो से अकेले रह रहे है। दोनों बच्चे मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर रहे और लाखो कमा रहे है। लेकिन दूर विदेशो में सेटल है ।हमलोग तो छोटी-छोटी खुशियो को तरस जाते है । क्या यही कामयाबी ?

— विभा कुमारी “नीरजा”

*विभा कुमारी 'नीरजा'

शिक्षा-हिन्दी में एम ए रुचि-पेन्टिग एवम् पाक-कला वतर्मान निवास-#४७६सेक्टर १५a नोएडा U.P