लेख

नजर झुकानी ही पड़ जाती है

सोसलमीडिया की बुनियाद पर आज के समय में जो इमारत खड़ी की जा रही है वह आने वाले समय में कितनी टिकाऊ होगी इस बात का अंदजा बड़ी आसानी से लगाया जा सकता है फिर भी आज के लोग रोज एक नयी ईंट रखकर दिवार की चुनाई में व्यस्त हैं, बिना यह सोंचें कि ये दीवारें अपने वाले समय में कितनी मजबूत रह पायेगीं! इस ओर किसी का ध्यान नही जा रहा है। कोई भी तीज आये या त्यौहार ऐसे अवसरों पर तरह-तरह के रंग विरंगे लोग सोसलमीडिया प्लेटफार्म पर इस तरह से आ जाते हैं जैसे पहली बरसात में मेंढ़क निकल कर किसी खेत की मेंड पर बैठकर टर्र-टर्र कर रहे हों। हाल ही में बीते करवा चौथ के त्यौहार में सोसलमीडिया को देखकर लग रहा था मानो चांद पहलीबार चौथ के दिन आसमान में निकला हो इससे पहले न कभी चांद निकला और न कभी सुहागिनों ने ब्रत रखा था हद तो तब हो गयी जब कैमरे के सामने ही पानी पिलाना और पैलगना का कार्यक्रम भी सम्पन्न कर दिया गया! अरे भैया अगर यह एक दूसरे के प्रति असीम प्यार है तो इसका प्रदर्शन नही किया जाता है! कुछ भावनाऐ तो निजी रखनी चाहिए! इससे पहले भी लोग थे त्यौहार थे और हर त्यौहार बड़ी आस्था और भाव के साथ मनाते थे उन लोगों के समय में जब कभी छायाचित्र का समय आता था तो बड़ी सादगी और संजीदगी के साथ आस पास बैठकर छायाचित्र बनावा लेते थे फिर उस चित्र को चाहे जो, चाहे जब, चाहे जहां कोई भी देखे किसी प्रकार की हिचकिचाहट का सामना नही करना पड़ता था इस तरह की तस्वीरें आज भी सभी के घरो में बड़े बुजुर्गों की मौजूद होंगी, लेकिन आज के समय में जो तस्वीर तैयार हो रही है क्या उसे दीवारों पर लगाया जा सकेगा ? या किसी भी चलचित्र को सामूहिक रूप से परिवार में दिखाया जा सकेगा ? वर्तमान में कुछ भी सोसलमीडिया पर ढकेलना बहुत आसान है लेंकिन उसे एक परिवार में सामूहिक रूप से जहां प्रदर्शित करने की बात आती है तो नजर झुकानी ही पड़ जाती है अरे रील रोगियों! कुछ तो संस्कार को संरक्षित कर लो ये आगे चलकर आपके ही काम आने वाले हैं देखने वालों का क्या वह तो बहुत गहराई तक देखना चाहते हैं लेकिन तुम तो खांई में गिरने से बचो आने वाली पीढ़ी को क्या मुंह दिखाआगे, आज तुम खुद गुड़ खा रहे तो कल अपनों को गुलगुला से परहेज करने का प्रवचन किस मुंह से दे पाओगे।

क्या आज के दौर में ऑनलाईन रहना ही जिंदा रहने का सूबूत है ? क्या सोसलमीडिया प्लेटफार्म सिर्फ छिछोरापन और बेवजह की अफवाह फैलाने के लिये ही बना है ? मानते हैं कि कुछ लोग इसे अपनी कमाई का जरिया बना रखे हैं लेकिन अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करके कमाना अच्छी बात है किंतु अश्लीलता फैलाकर कमाई का प्रयास करना और मनोवांछित फल न प्राप्त होना तब तो एक तरह की ठगी की ही अनुभूति करायेगा। अगर संस्कारों को स्वाहा करके और हदों को पार करके यदि सोसलमीडिया प्लेटफार्म से चवन्नी अठन्नी मिलने भी लगा तो कौन सा तीर मार दिये हो! इधर हया भी तो ताख पर रख चुके हो! जिस लिबास में घर से बाहर नही निकल पाते हो उस लिबास में वीडियो बनाकर दुनियां को परोस रहे हो फिर उसकी के नीचे लिखना पड़ रहा है कि हम से घटिया सोंच वालों दूर रहें ? अरे बढिया सोंच वाले तो बेचारे शर्म से ही मर जाते हैं और उसे सिरे से ही खारिज कर देते हैं अब आपकी बढ़िया वाली पोस्ट पर घटिया किस्म के लोग ही तो तारीफों का पुल बॉधेंगे और आपका मनोबल बढ़ाते हुये मनोरंजन करेंगे इससे आपको लगेगा की आपके प्रशंसकों की फौज तैयार हो रही है अरे ऐसी फौज को क्या करोगे अभी जुलाई 2025 में संभल जनपद के असमोली थाने में 4 युवतियों पर सोसलमीडिया प्लेटफार्म पर अश्लीलता फैलाये जाने को लेकर मुकदमा दर्ज किया गया तो जमानत के लिये चार लोग भी सामने नही आये।


कभी यह सोंचा कि मोबाइल मेरे लिये बना है या मैं मोबाइल के लिये बना हूं, मोबाइल को अपना असली कार्य पता है! लेकिन मोबाइल रखने वालों को अपने जीवन का असली उद्देश्य नही पता है, मान लीजिए कि आप मोबाइल से कोई रील बना रहे हैं या फिर कोई चलचित्र ही देख हैं इसी बीच किसी का फोन आ गया तो उसे बन्द करने के लिये आपका मोबाइल आपसे अनुमति नही मांगेगा बल्की फालतू के सारे काम अपने आप ही बंद करके सीधे घनघनाना शुरू हो जायेगा क्योंकि मोबाइल को अपना असली काम याद है बाकी तो सब फालतू की घेराबंदी है, ठीक उसी प्रकार हर व्यक्ति को अपने जीवन के असली मकसद को याद रखना चाहिए और अपने परिवारिजनों के मोबाइल का एक अच्छे अभिभावक होने के नाते समय-समय पर परीक्षण करते रहना चाहिए ताकि आपके अपने मार्ग से न भटक सकें और अपने जीवन के कमसद को पूर्ण कर सफलता को प्राप्त हो सकें।

राज कुमार तिवारी ‘राज‘
बाराबंकी उत्तर प्रदेष

राज कुमार तिवारी 'राज'

हिंदी से स्नातक एवं शिक्षा शास्त्र से परास्नातक , कविता एवं लेख लिखने का शौख, लखनऊ से प्रकाशित समाचार पत्र से लेकर कई पत्रिकाओं में स्थान प्राप्त कर तथा दूरदर्शन केंद्र लखनऊ से प्रकाशित पुस्तक दृष्टि सृष्टि में स्थान प्राप्त किया और अमर उजाला काव्य में भी सैकड़ों रचनाये पब्लिश की गयीं वर्तामन समय में जय विजय मासिक पत्रिका में सक्रियता के साथ साथ पंचायतीराज विभाग में कंप्यूटर आपरेटर के पदीय दायित्वों का निर्वहन किया जा रहा है निवास जनपद बाराबंकी उत्तर प्रदेश पिन २२५४१३ संपर्क सूत्र - 9984172782