मुक्तक/दोहा

दीपावली पर दोहे

दीपोत्सव की रात में, मन का दीप जलाय।

ज्ञान ज्योति आलोक दे, सत की राह दिखाय।।

दीपों की रोशनी से, जगमग हो संसार।

अंधकार को दूर कर, फैले प्रेम अपार।

ज्ञान का दीप जलाकर, हम पाएं सुख संत।

दीप मालिका दीप से, फ़ैले ज्ञान अनंत।।

प्रेम, ज्ञान आलोक से, दीप जलाएं नीर।

प्रकाश पर्व की रात, बढ़े प्रेम की धीर।।

डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

जवाहर नवोदय विद्यालय, मुरादाबाद , में प्राचार्य के रूप में कार्यरत। दस पुस्तकें प्रकाशित। rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in मेरी ई-बुक चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका) आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह) पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह) सफ़लता का राज़ समय की एजेंसी दोहा सहस्रावली(1111 दोहे) बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह) मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह) समर्पण(काव्य संग्रह)