कथा साहित्यकहानी

विह्स्की विला – भाग 7

कहते हुए ज्वाइस के चेहरे पर बेहद विश्वाश था और वही विश्वाश मेरे चेहरे पर है कि नहीं ये देखने के लिए ज्वाइस ने अपनी बात खत्म करके मुझे देखा होगा।
ज्वाइस के आत्मविश्वाश ने मेरे चेहरे को भी यकीन से भर दिया था।
ज्वाइस के कहने के अंदाज़ और हमारे चेहरे के हाव भाव ने इन्स्पेक्टर पे अच्छा खासा असर डाला था ये हमें उसकी आगे की बातों से पता चल गया था।
‘आपके अब्बू मतलब आपके पापा दुबई में नहीं बल्कि यहीं इंडिया में थे।’ इंस्पेकटर की कही गई बात ने हमें सतर्क कर दिया था।
‘वो मेरे अब्बू या पापा नहीं बल्कि मेरे मॉम के दूसरे हस्बेंड हैं।’ ज्वाइस ने बेवजह का प्रतिवाद किया था जिसे इन्स्पेक्टर ने फ़ौरन ही मानते हुए आगे पूछा ‘आप जानती थी वो इंडिया में हैं।’
ज्वाइस ने जवाब देने से पहले न जाने क्यों मेरी तरफ देखा, मैं उसे ही देख रहा था। इन्स्पेक्टर की घाघ निगाह हम पर थी। वो अपनी निगाह को और धार देकर बोला ‘मोहतरमा ज्वाइस कुछ भी बोलने से पहले इतना जान लो हमारे पास सबूत हैं कि आपके अब्बू सॉरी आपकी मॉम के शौहर आपकी मॉम के कत्ल वाली रात की दोपहर आपसे लखनऊ के एक रेस्त्रां में मिले थे।’
‘जी मिले थे।’ ज्वाइस ने इन्स्पेक्टर की बात खत्म होते ही तुरंत जवाब दिया।
‘किसलिए।’
ज्वाइस खामोश रही।
इन्स्पेक्टर ने अपना सवाल दुबारा दोहराया।
ज्वाइस अब भी खामोश थी।
‘आपकी ख़ामोशी आप दोनों पर मेरे शक को मजबूत करेगी।’ इन्स्पेक्टर ने तनिक सख्त लहजे में कहा तो ज्वाइस बोली ‘वो मैं सबके सामने नहीं बता सकती।’
सबके सामने, यहाँ ऐसा कौन है जिससे आप कुछ परहेज कर रही हैं ?’ इंस्पेकटर ने कह कर हँसते हुए मेरी और देखा।
ज्वाइस भी उस वक्त मुझे ही देख रही थी।
‘ओह तो आप कोई बात उस शख्स के सामने नहीं बताना चाहतीं जिसके सामने शायद आप कई बार…।’ इन्स्पेक्टर ने अपनी बात भले ही अधूरी छोड़ दी हो पर उसकी बात का मतलब हम दोनों ही समझ गए थे।
‘लाज शर्म भी कोई चीज है, आँखों की ह्या भी कुछ होती है इन्स्पेक्टर साहब।’ हालाँकि मुझे और ज्वाइस को इंस्पेकटर की कही बात से गुस्सा तो आया था पर शांत बने रहना हमारी मज़बूरी थी। ज्वाइस ने जवाब भी शांत ढंग से दिया था।
‘ज्वाइस की बात सुनके मैं उठते हुए बोला ‘ज्वाइस मैं बाहर तुम्हारा इंतज़ार करूँगा।’ मैं उठ पाता उससे पहले ही ज्वाइस मेरा हाथ पकड़ते हुए बोली ‘कोई नहीं गालव अगर इंस्पेकटर को आपके सामने ही सुनना है तो कोई बात नहीं।’ फिर वो इन्स्पेक्टर से बोली ‘इन्स्पेक्टर साहब मेरी मॉम के शौहर मुझसे इसलिए मिले थे कि उससे पहले जब वो कानपुर में घर पर मुझे मिले तो कुछ पूछा था, वो उसका ही जवाब लेने आये थे।’
‘अच्छा ऐसा क्या पूछा था जिसका जवाब लेने के लिए उन्हें दुबई का बहाना बनाकर कानपूर से आपके पास लखनऊ आना पड़ा।’
‘वो मुझसे हमबिस्तरी का अरमान रखते थे।’
ज्वाइस के जवाब ने मेरे और नवेद खान दोनों के चेहरे की रंगत कुछ पलों के लिए उड़ा दी। अगरचे में ज्वाइस के इस जवाब को पहले से जानता था पर फिर भी ऐसी बात सुनके मुझे बेहद गुस्सा आया था।
इंस्पेकटर अपने होठों में बुदबुदाया ‘बड़ा ही घटिया आदमी है वो।’ फिर ज्वाइस से मुखातिब होकर पूछा तो आपने क्या जवाब दिया उसे ?’
‘वही जो कानपूर में घर पर दिया था।’
‘घर पे क्या जवाब दिया था ?’
‘तूं मुझे क्या मेरी जुती भी टच नहीं कर सकता, बाकी तो बहुत दूर की बात है।’
‘हम्म।’ ज्वाइस की बात सुनके इंस्पेकटर नवेद धीरे – धीरे दो तीन बार अपना सर हिलाया फिर बोला ‘आपसे झिड़के जाने के बाद शायद उसकी जिस्मानी हवस बढ़ गई होगी।’
‘ये मैं कैसे कह सकतीं हूँ।’
‘क्योंकि वो लखनऊ से सीधे यहाँ कानपुर में जिस्मानी भूख खत्म करने के लिए मिसेज समरीन मतलब आपकी मॉम से मिलने आया।’
‘आया होगा, उसकी बीवी थी वो और उनके बीच हमबिस्तरी तो आम बात होगी।’
लेकिन वो घर न जाके विह्स्की विला क्यों गया, जबकि उसे समरीन से मिलने के लिए तो घर पहुंचना था।’
इन्स्पेक्टर सच में बेहद घाघ था, उसके इस सवाल मैं सहम गया था ज्वाइस की तरफ मैने देखा तो वो मुझे अभी भी शांत प्रतीत हुई।
‘उसे मैने बताया था कि उसकी बीवी उस वक़्त कहाँ पर होगी।’ ज्वाइस ने बेफिक्री के अंदाज़ में जवाब दिया।
‘ये बताने की कोई ख़ास वजह ?’
‘हाँ।’
‘क्या ?’
‘मुझसे जिस्मानी सम्बन्ध बनाने की बात दोहराके उसने मेरा गुस्सा बेकाबू कर दिया था और मैने बिफरते हुए उससे कहा अगर उसे सेक्स की इतनी ही भूख तो अपनी बीवी को क्यों नहीं शांत रखता और वो क्योंकर तेरी ग़ैरहाज़री में विह्स्की विला जैसे क्लबों में दूसरों की भूख शांत करती रहती है।’
ज्वाइस की बात सुनके इन्स्पेक्टर ने कुछ देर सोचने की मुद्रा अख्तियार की और फिर बोला ‘मोहतरमा आप आपने इस लौंडे के साथ जा सकतीं हैं। जब आप यहाँ आयी थी तो मैं पुलिस जवानो को आपके मॉम के शौहर को पकड़ने के लिए ही भेज रहा था। वो जल्द ही हमारी हिरासत में होगा। जिस चाकू से समरीन मैडम का कत्ल हुआ उसे फोरेंसिक के लिए भेज दिया गया है। CCTV कैमरे में विहस्की विला के उस कमरे में जहाँ समरीन मैडम का कत्ल हुआ तसद्दुक हुसैन के जाने और वहां से निकलने की फुटेज मिल चुके हैं। जल्द ही बाकी सबूत भी इकठ्ठा करके अदालत में पेश किये जायँगे।’
क्रमश:
— सुधीर मौर्य

सुधीर मौर्य

नाम - सुधीर मौर्य जन्म - ०१/११/१९७९, कानपुर माता - श्रीमती शकुंतला मौर्य पिता - स्व. श्री राम सेवक मौर्य पत्नी - श्रीमती शीलू मौर्य शिक्षा ------अभियांत्रिकी में डिप्लोमा, इतिहास और दर्शन में स्नातक, प्रबंधन में पोस्ट डिप्लोमा. सम्प्रति------इंजिनियर, और स्वतंत्र लेखन. कृतियाँ------- 1) एक गली कानपुर की (उपन्यास) 2) अमलतास के फूल (उपन्यास) 3) संकटा प्रसाद के किस्से (व्यंग्य उपन्यास) 4) देवलदेवी (ऐतहासिक उपन्यास) 5) माई लास्ट अफ़ेयर (उपन्यास) 6) वर्जित (उपन्यास) 7) अरीबा (उपन्यास) 8) स्वीट सिकस्टीन (उपन्यास) 9) पहला शूद्र (पौराणिक उपन्यास) 10) बलि का राज आये (पौराणिक उपन्यास) 11) रावण वध के बाद (पौराणिक उपन्यास) 12) मणिकपाला महासम्मत (आदिकालीन उपन्यास) 13) हम्मीर हठ (ऐतिहासिक उपन्यास) 14) इंद्रप्रिया (ऐतिहासिक उपन्यास) 15) छिताई (ऐतिहासिक उपन्यास) 16) सिंधुसुता (ऐतिहासिक उपन्यास) 17) अधूरे पंख (कहानी संग्रह) 18) कर्ज और अन्य कहानियां (कहानी संग्रह) 19) ऐंजल जिया (कहानी संग्रह) 20) एक बेबाक लडकी (कहानी संग्रह) 21) हो न हो (काव्य संग्रह) 22) पाकिस्तान ट्रबुल्ड माईनरटीज (लेखिका - वींगस, सम्पादन - सुधीर मौर्य) पुरस्कार - कहानी 'एक बेबाक लड़की की कहानी' के लिए प्रतिलिपि २०१६ कथा उत्सव सम्मान। ईमेल ---------------sudheermaurya1979@rediffmail.com