हसरतों से गुजारिश है कि कहीं और जा बसें
थकी सी राहें,
सपनों की धूल उड़े,
मन खो जाए।
चाँदनी फीकी,
रात कुछ कहती है,
ख़ामोशियाँ भी।
मंज़िल न पूछो,
कदम थम जाएँ जब,
हवा बुलाए।
आँखों में ठहर,
एक अधूरी चाह,
धूप नर्मी दे।
दिल की सरहदें,
अब भी बाकी हैं,
हसरतें चलें।
कोई पुकारे,
भीतर की आवाज़,
नई दिशा दे।
चलो वहाँ जहाँ,
सुकून मिल जाए,
दिल मुस्कुराए।
— डॉ. अशोक
