कविता

अब न बिगाड़ो

गीत मेरे क्यों,
बेसुरे से हो गए हैं,
साज वही, संगीत वही,
सुर भी वही हैं!

बोल मेरे क्यों,
अटपटे से हो गए हैं,
ताल वाही, उस्ताद वही,
राग भी वही हैं!
सरगम मेरे क्यों,
आगे पीछे हो गए हैं,
तानपूरा, शहनाई वही,
लय भी वही हैं!

जानता हूं जमीं पर,
पैर मेरे थम गए हैं,
थाप तबले की कट रही है,
जबकि रात थोड़ी बची है!
मैं आगाह करता हूं,
उस्ताद सुन लो कुछ भी हो,
ताल अपनी ही बजाओ,
थोड़ी बची है अब न बिगाड़ो!!

— डॉ. सतीश “बब्बा”

सतीश बब्बा

पूरा नाम - सतीश चन्द्र मिश्र माता - स्व. श्रीमती मुन्नी देवी मिश्रा पिता - स्व0 श्री जागेश्वर प्रसाद मिश्र जन्मतिथि - 08 - 07 - 1962 शिक्षा - बी. ए. ( शास्त्री ) पत्रकारिता में डिप्लोमा, कहानी लेखन एवं पत्रकारिता में डिप्लोमा। संप्रति - विभिन्न पत्र पत्रिकाओं, संकलन में 1985 से लगातार प्रकाशित, तिब्बती पत्रिकाओं में प्रकाशित और भारत तिब्बत मैत्री संघ का सदस्य, संरक्षक भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महा संघ उ प्र। साहित्य केशरी आदि लगभग 1500 से अधिक साहित्य सम्मानों से सम्मानित प्रकाशित :- कविता संग्रह "साँझ की संझबाती" मोबाइल ऐप्स में प्रकाशित लघुकथा / कहानी संकलन "ठण्ड की तपन" और कहानी संकलन "सुदामा कलयुग का" प्रकाशित, अमाजोन आदि पर उपलब्ध! पता - ग्राम + पोस्टाफिस = कोबरा, जिला - चित्रकूट, उत्तर - प्रदेश, पिनकोड - 210208. मोबाइल - 9451048508, 9369255051. ई मेल - babbasateesh@gmail.com