गीत/नवगीत

गीत

सूर्य भांति चमक रही कुर्बानी गुरू तेग बहादुर की।
भारत के सिर ऊपर ताज जवानी गुरू तेग बहादुर की।

हिन्दुत्व के लिए शहादत देकर हिन्द की चादर कहलाए।
धर्म ज़मीर आज़ादी एंव बलशाली वाले जज़्बे पाए।
सारे जग में सब्र संतोष निशानी गुरू तेग बहादुर की।
सूर्य भांति चमक रही कुर्बानी गुरू तेग बहादुर की।

भाई जैता जी ने सच्चे अनुयाई के फर्ज़ निभाए।
इस कर के ही रंघरेटा गुरू का बेटा थे कहलाए।
इतिहास में एक सागर भांति रवानी गुरू तेग बहादुर की।
सूर्य भांति चमक रही कुर्बानी गुरू तेग बहादुर की।

भाई दयाला एक ज़मीर सति दास मति दास बहादुर।
सब ने अजब शहादत पा कर राष्ट्र से निकाला है डर।
गोरवमई इक याद बनी लासानी गुरू तेग बहादुर की।
सूर्य भांति चमक रही कुर्बानी गुरू तेग बहादुर की।

सिक्ख इतिहास में महत्वपूर्ण केन्द्र की करके सृजनता।
जिस में शक्ति भक्ति वाली फिर भर दी थी संपूर्णता,
आनंदपुर ने हस्ति पहचानी गुरू तेग बहादुर की।
सूर्य भांति चमक रही कुर्बानी गुरू तेग बहादुर की।

संवेदनशील त्याग सब्र की एक ज्योति ढलती रहती।
हरि मन्दिर में इस कर के ज्योत इलाही जलती रहती।
मानव मूल्य नैतिकता की बाणी गुरू तेग बहादुर की।
सूर्य भांति चमक रही कुर्बानी गुरू तेग बहादुर की।

बालम जैसे अम्बर भीतर नित्य ही चढ़ते चांद सितारे।
एैसे सदियों तक रहने हैं यह मंगल मई संदेश न्यारे।
राष्ट्र में इक ज्योति जगे रूहानी गुरू तेग बहादुर की।
सूर्य भांति चमक रही कुर्बानी गुरू तेग बहादुर की।

— बलबिन्दर बालम

बलविन्दर ‘बालम’

ओंकार नगर, गुरदासपुर (पंजाब) मो. 98156 25409