खूबसूरत तितलियों की घटती आबादी
एक जानकारी के मुताबिक मप्र में धार जिले के मांडू में तितली पार्क के अलावा चिड़ियाघर यानी जू की कवायद की जा रही थी|पार्क में विभिन्न प्रजातियों की तितलियां से पार्क में तितलियों के पलने-बढ़ने के लिये अनुकूल वातावरण के लिए पौधे लगाये जाने की योजना भी थी ताकि विभिन्न प्रजातियों की तितलियों का आकर्षण होकर तितलियाँ यहाँ पर बनी रह सके। तितलियों के विकसित होने की बटरफ्लाई (तितली) की प्रजनन क्रिया एक दिलचस्प और जटिल प्रक्रिया है, जो आमतौर पर चार मुख्य चरणों में बाँटी जाती है: मिलन (मेटिंग),अंडे देना (लाइंग), अंडों का फटना (हैचिंग), और लार्वा का विकसित होना। तितली पार्क प्रकृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण पहल है।इससे पार्क में आने वाले बच्चे और लोगों का प्रकृति के सानिध्य के साथ सामान्य ज्ञान भी बढ़ेगा।यह तितली पार्क ईको पर्यटन के क्षेत्र में प्रदेश को नई पहचान देगा।भविष्य में यहां चिड़ियाघर भी बनाया जाए।ताकि मांडव आने वाले पर्यटक आने वाले समय में ऐतिहासिक धरोहरों के साथ तितली पार्क का भी आनंद ले सकें।पर्यटन को बढ़ावा एवं मांडू के प्रति लोगों का आकर्षण बढाने के प्रति पार्क अच्छी योजना रहेगी|कुछ समय पहले मध्य प्रदेश से पर्यावरण प्रेमियों के लिए बहुत ही अच्छी खबर आई थी कि दो कीट विज्ञान शास्त्रियों ने तितली की एक प्रजाति,एक्सेरसिस ब्लू ढूंढ निकाली है।ख़ास बात ये थी कि इन तितली को लगभग 80 साल पहले विलुप्त घोषित कर दिया गया था। कीट विज्ञान शास्त्रियों.ने बरगी डैम के पास तितली की इस प्रजाति को देखा था। इसके बाद इन दोनों को ये तितली दोबारा जबलपुर के देवताल में देखा गया था ।कीट विज्ञान शास्त्रियों ने दोनों ही स्थानों पर मिली तितलियों को सावधानी से प्रिजर्व की गई है।पश्च्यात इन स्पेसिमेन को फ्लोरिडा म्यूजियम ऑफ़ नेचुरल हिस्ट्री में रखे संरक्षित स्पेसीमेन्स से इन तितलियों को तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा।दोनों कीट विज्ञान शास्त्रियों ने जो तितलियां इकट्ठा वो पैटर्न ऑफ़ विंग्स, रंग, आकार, एंटीना, साइज़ आदी मापदंडों के आधार पर एक्सेरसिस ब्लू तितली से मिलती-जुलती हैं।.विलुप्त होने से पहले आखिरी बार इन तितलियों को सैन फ़्रैंसिस्को को सनसेट डिस्ट्रिक्ट में देखा गया था.।ख़ास बात ये है कि इससे पहले इस प्रजाति को भारत में नहीं देखा गया। इस तितली को भी भारत में पाई जाने वाली 1500 से ज्यादा तितलियों की सूची में शामिल किया जाएगा। एक जानकारी के मुताबिक गांधी सागर में वन विभाग और गांधी सागर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी की संयुक्त टीम ने 45 से अधिक तितली की प्रजाति मिली एवं दुनिया की सबसे छोटी ग्रास ज्वेल भी मिली|गांधीसागर अभ्यारण्य न सिर्फ पक्षियों और जीवों के साथ ये स्थान तितलियों के लिए भी अनुकूल है| शहरीकरण की वजह से विलुप्त होने वाली पहली तितली एक्सेरसिस ब्लू से उम्मीद है इस बार इंसान इन्हें संरक्षित कर लेंगे।एक जानकारी के मुताबिक आईसीयूएन के अनुसार पिछले एक दशक में इन तितलियों की आबादी में 72 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है, जिसके लिए जलवायु परिवर्तन और बढ़ता इंसानी हस्तक्षेप जिम्मेवार है| प्रवास के लिए 6,400 किलोमीटर की यात्रा करने वाली मोनार्क तितलियों को पहली बार आईसीयूएन द्वारा जारी रेड लिस्ट में संकटग्रस्त प्रजातियों को सूची में शामिल किया गया है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस यात्रा में उनकी कई पीढ़ियां गुजर जाती हैं।ऐसा नहीं है कि इस लिस्ट के अनुसार केवल मोनार्क तितलियां ही संकट में है|इन खूबसूरत तितलियों की घटती आबादी के पीछे की वजह की बात करें तो इसके लिए इनके आवास को होता नुकसान, वन विनाश, कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग, शहरी विस्तार, सूखा, जलवायु परिवर्तन जैसे कारक मुख्य रूप से जिम्मेवार हैं। आईसीबीएन के अनुसार यह संकटग्रस्त प्रवासी मोनार्क तितली, मोनार्क तितली (डेनिस प्लेक्सस) की ही एक उप-प्रजाति है। जो सर्दियों में मैक्सिको और कैलिफोर्निया से संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा की ओर गर्मियों के प्रजनन के लिए मैदानों में प्रवास के लिए जानी जाती है। अनुमान है कि पिछले एक दशक में इन आबादी में 72 फीसदी की गिरावट आई है। कृषि और शहरी विकास के लिए वैध और अवैध रूप से साफ किए जा रहे जंगलों ने मेक्सिको और कैलिफोर्निया में तितलियों के शीतकालीन आश्रय को पहले ही काफी हद तक नष्ट कर दिया है।वहीं गहन कृषि के लिए कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग इन तितलियों और मिल्कवीड को नुकसान पहुंचा रहा है। गौरतलब है कि मिल्कवीड वो मेजबान पौधा है जिसे मोनार्क तितली के लार्वा द्धारा खाया जाता है।इसके साथ-साथ जलवायु में आते बदलावों ने भी प्रवासी मोनार्क तितली को काफी हद तक प्रभावित किया है। जो एक तेजी से बढ़ता हुआ खतरा है। इसके कारण पड़ने वाला सूखा जहां एक तरफ मिल्कवीड के विकास को प्रभावित कर रहा है वहीं साथ ही इसकी वजह से जंगल में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। बढ़ता तापमान इन तितलियों को मिल्कवीड के उपलब्ध होने से पहले ही प्रवास करने को मजबूर कर रहा है। वहीं मौसम की मार के चलते इस प्रजाति की लाखों तितलियों को असमय जान देनी पड़ी है।इसके लिए प्रभावी, बेहतर तरीके से संरक्षित क्षेत्रों की आवश्यकता है। जैव विविधता का यह संरक्षण बदले में समाज को भोजन, पानी, स्थायी जैसी जरुरी सेवाएं देने में मददगार होता है।तितलियों के तितली उधान कई स्थानों पर निर्मित है।और कई स्थानों पर बनाए जाने की पहल भी की गई है।नर तितलियों के लिए गर्मी के मौसम में फूलों के बगीचों मे छोटे गढ्ढे बनाकर उसमें पानी भर कर रखने से मड पडलिंग हेतु स्थान बनता है जो मादा तितली के लिए सोडियम एवं अमिनो एसिड इन्ही स्थान से प्राप्त कर नर लाकर मादा तितली के जरिए अंडों को पूर्ण विकसित कर तितलियों की संख्या बढ़ाने में मददगार होता है।किसान भी अपने खेतों के कुछ हिस्से में फूलों के पौधे लगाए ताकि तितलियों को पराग हेतु आहार की प्राप्ति हो सके।तितलियों की संख्या में वृद्धि होने से रंग बिरंगी तितलियों को बच्चे महज किताबों के अलावा वास्तविक रूप से अपने आस पास देख सकें।किसानों के सहयोग,एवं तितली उधान के होने से तितलियां विलुप्त होने से बच सकेगी।
— संजय वर्मा “दृष्टि”
