गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

रहा यह देश वीरों का, सभी इसको सँभालेंगे।
कभी आये कोई दुश्मन, तभी उसको हकालेंगे।।

उड़े जाते सभी अब तो, सुनो अब अर्श में देखो।
अगर पंछी यहाँ आयें उन्हें हम देख पालेंगे।।

कहाँ जाते अभी छोड़े, कभी तुम छोड़ मत देना।
कहो बिन हम तुम्हारे ही, अभी जीवन निभा लेंगे।।

करो घायल नहीं हमको, बड़ा नाज़ुक हमारा दिल।
करो मत दिल्लगी हमसे, अभी हस्ती मिटा लेंगे।।

बढ़ा अब बाढ़ का पानी, बहा है तेज़ धारा में।
अभी लो थाम हाथों से, चलो हम पार पा लेंगे। ।

मुहब्बत की हमीं ने तो, निपटना भी हमें आता ।
अगर तुम बेवफ़ा निकले, तुम्हें दिल से हटा लेंगे।

खड़े हैं देख लो दर पर, चलो दे दें खुशी उनको।
अगर कोई नहीं उनका, उन्हें अपना बना लेंगे।।

बड़ी मुश्किल लगे जीना, नहीं हिम्मत कभी हारो।
चले भी आओ मिलजुल कर कोई रस्ता निकालेंगे।।

यही मंजर लगे प्यारा, जहाँ हम-तुम मिले देखो।
सुनो नफ़रत दिलों से हम, चलो बाहर उछालेंगे।।

— रवि रश्मि ‘अनुभूति’