मुझको गुरुर होगा
दिल में सनम बसा लो मुझको गुरुर होगा।
पल भर गले लगा लो दिल को सुरूर होगा।
काँटों भरे सफऱ में तू हौसला मेरा है।
देखा जो ख्वाब मिलकर पूरा जरूर होगा।
सीखा नहीं था ऐसे अपनों से रूठ जाना।
रूठा वोआज हमसे किसका कुसूर होगा।
उसका खयाल दिल में तसव्वुर निगाह छाया।
ऐसी चमक निशानी वह कोहिनूर होगा।
किसको मृदुल सुनाएँ किस्से वो जिंदगी के।
सोंचा नहीं दिलों में सबके फितूर होगा।
— मंजूषा श्रीवास्तव “मृदुल”
