गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

फिर क्या पढ़ा ।।
जब ना गुना ।।

वो साथ क्या ।।
दिल ना मिला ।।

दिल ना मिले,
मन ही मिला ।।

यारी किये ,
धोका भी खा ।।

मंजिल है तय,
मन तो बना ।।

— समीर द्विवेदी नितान्त

समीर द्विवेदी नितान्त

कन्नौज, उत्तर प्रदेश