चिड़िया रानी
नन्ही नन्ही छोटी चिड़ियों,
तुम सब कैसे रहती हो?
कैसे बना लेती हो घोंसला?
मुझको पता हैं क्या खाती हो?
गौरैया रानी उड़ मत जाना ,
तुमको रोटी दिलवाते हैं ,
तोते राजा बाहर निकलो,
तुम पिंजरे में मिर्च न खाओ,
पंख फैला तुम आसमान में,
सबके संग उड़ कर दिखलाओ।
पानी में बगुला जी खड़े हैं ,
चोंच में जो मछली पकड़े हैं।
सांप को खाकर मोर खड़े हैं,
बदल देख वो नाच रहे हैं।
कौआ मामा छत पर आकर,
छुप छुप तुम चावल खाते हो।
मेरी कबूतर सबसे न्यारी ,
बिन बिन कर दाना खाती हैं।
कितनी प्यारी बोलो इसकी,
पास में जाओ उड़ ही जाती हैं।
नन्ही नन्ही प्यारी चिड़ियों,
मुझको तो तुम सब भाती हो।
मुझको पता हैं क्या खाती हो।
कहां तुम्हारा शयन कक्ष हैं?
कहां तुम्हारा बैठक खाना ?
यह भी तो बतलादो चिड़िया,
कहां बनती हो तुम खाना ?
— आसिया फारूकी
