लघुकथा

अंतिम दुआ

“सन्तोष! तुम यहाँ? तुम तो यहाँ से जा चुके हो।”
“जानना नहीं चाहोगे कि मेरे जाने का क्या कारण था?”
“जानता हूँ। मैं चेन स्मोकर हूँ। वर्षों एक साथ रहने के बाद भी तुम्हें सिगरेट का धुँआ बर्दाश्त नहीं होता था।”
“सच कहा अमित! बावजूद इसके तुम्हारे छोड़ गये धुँये ने मेरे फेफड़े में घर बना लिया और मेरी कैंसर की यात्रा की परिणति अंतिम यात्रा में हो गयी।”
“ओह! यह तो बहुत बुरा हुआ दोस्त! तुमने तो सिगरेट का एक कश भी नहीं लिया। अब जाओ। ईश्वर तुम्हारी आत्मा को शांति प्रदान करे।”
“जाता हूँ और दुआ करूँगा कि तुम्हें अपने सबसे प्रिय स्वजन के लिये शांति की प्रार्थना न करना पड़े।”
“नहीं …नहीं..ऐसा नहीं हो सकता है,” पसीने से लथपथ अमित की आँखें खुली। साइड टेबल पर पड़े सिगरेट को फेंक सोयी हुई नन्हीं बबली को चूमने लगा और बड़बड़ाया,”मैं सपने को सच नहीं होने दूँगा।

— डाॅ अनीता पंडा ‘अन्वी’

डॉ. अनीता पंडा

सीनियर फैलो, आई.सी.एस.एस.आर., दिल्ली, अतिथि प्रवक्ता, मार्टिन लूथर क्रिश्चियन विश्वविद्यालय,शिलांग वरिष्ठ लेखिका एवं कवियत्री। कार्यक्रम का संचालन दूरदर्शन मेघालय एवं आकाशवाणी पूर्वोत्तर सेवा शिलांग C/O M.K.TECH, SAMSUNG CAFÉ, BAWRI MANSSION DHANKHETI, SHILLONG – 793001  MEGHALAYA aneeta.panda@gmail.com