बाल कहानी-डेनियल और सांता क्लॉज़
बर्फ गिरने की वह शांत रात डेनियल को हमेशा याद रहती है। खिड़की के बाहर चीड़ के पेड़ों पर जमी बर्फ चमक रही थी और कमरे में जलती छोटी-सी मोमबत्ती हल्की रोशनी फैला रही थी।
डेनियल की आँखों में एक ही सवाल तैर रहा था—“क्या सच में सांता क्लॉज़ आएंगे?”
माँ-पापा तो बचपन से हर साल कहते आए थे, “क्रिसमस की रात सांता अच्छे बच्चों को उपहार देते हैं।” और डेनियल हर साल अपने तकिये के नीचे एक चिट्ठी रखता था—छोटी-सी, मासूम, टेढ़ी-मेढ़ी लिखावट वाली।
उस रात भी वह चिट्ठी लिखकर सो गया—“प्रिय सांता, इस बार आप आएँगे ना? मैं आपका इंतज़ार करूँगा।” धीरे-धीरे उसकी आँखें मुंदने लगीं…और फिर शुरू हुआ एक अनोखा, चमकीला सपना।
डेनियल ने खुद को एक सफ़ेद, मुलायम बर्फीली राह पर खड़े पाया। हवा ठंडी थी,पर उसके भीतर अजीब-सी गर्माहट थी। तभी दूर से झनझनाती घंटियों की आवाज़ सुनाई दी — टिन-टिन-टिन! एक लाल रंग की स्लेज, बेलों से सजी,आकाश से उतर रही थी। और उस स्लेज पर—लाल टोपी, सफ़ेद दाढ़ी और चमकती आँखों वाला सांता क्लॉज़!
डेनियल की साँसें थम गईं। सांता पास आए,झुककर मुस्कुराए और बोले, “ओह! मेरे छोटे दोस्त डेनियल…मैं जानता हूँ कि तुम मेरा इंतज़ार करते हो।” डेनियल दौड़कर उनसे लिपट गया।
सांता ने उसे प्यार से उठाया और उसकी टोपी ठीक की—जैसे कोई दादा अपने पोते को संभालता है। “मेरे पास तुम्हारे लिए कुछ खास है,”सांता ने अपना बड़ा सा थैला खोला।
थैले से निकला—एक छोटा ट्रेन सेट,रंग-बिरंगी किताबें, एक नन्हा-सा बोलता खिलौना चूहा और सबसे ऊपर—एक बड़ा हरा डिब्बा, लाल रिबन से बंधा हुआ। डेनियल की आँखें चमक उठीं। “ये… ये सब मेरे लिए?”
सांता हँसे, “हाँ, क्योंकि तुम्हारे दिल में हमेशा प्यार है… और ऐसे दिल वाले बच्चों के लिए मेरे थैले में हमेशा जगह रहती है।”
जैसे ही डेनियल ने बड़ा हरा डिब्बा पकड़ा, आसमान में हल्की रोशनी फैलने लगी। सांता धीरे-धीरे धुंधले होने लगे।
डेनियल घबरा गया— “सांता, आप फिर आएँगे ना?”
सांता की आवाज़ हवा में घुली— “जब भी तुम प्यार बाँटोगे…मुझे अपने दिल में पाओगे।” और उसी पल—डेनियल की आँख खुल गई।
सुबह कमरे में धूप तैर रही थी। डेनियल बिस्तर से कूदकर उठा… और हैरानी से देखता रह गया— उसके तकिये के पास रखा था वही बड़ा हरा डिब्बा, लाल रिबन से बंधा हुआ! वह दौड़कर माँ-पापा के पास पहुँचा और चिल्ला उठा, “माँ! पापा! मैंने सच में सांता को देखा! उन्होंने मुझे गले लगाया… और यह सब दिया!”
माँ ने मुस्कुराकर उसका माथा चूमा, “सपने सच होने के लिए ही तो आते हैं, मेरे बच्चे।”
पापा ने उसे गोद में उठाया, “और सांता…वो दिल में रहने वाले दोस्त हैं।”
डेनियल उस दिन से आज तक सांता को नहीं भूला…क्योंकि उसे मालूम हो चुका था—सिर्फ उपहार ही असली जादू नहीं होते, बल्कि वह प्यार… जो किसी सपने में भी मिल जाए।
— डॉ. निशा नंदिनी भारतीय
