गीत – नए साल पर
जुग-जुग जीवे भारत प्यारा सब को साल मुबारक।
सागर धरती अम्बर सारा सब को साल मुबारक।
देश विदेशों में बैठे मेहनतकार जवानों।
हरियाली खुशहाली देवे सिर पर प्यार जवानों।
धरती को चुमे उजियारा सब को साल मुबारक।
जुग-जुग जीवे भारत प्यारा सब को साल मुबारक।
बीच सियासत शक्ति भक्ति शुद्ध बुद्धि आ जाए।
धर-घर आधुनिक यंत्र आएं विकसित देश कहाए।
शुभ तिरंगे का है नारा सब को साल मुबारक।
जुग-जुग जीवे भारत प्यारा सब को साल मुबारक।
सब धर्मो की एक ईकाई दूजे के काम आना।
तां कि दीपक जगमग चमके तेल निरंतर पाना।
इस के बिन नहीं कोई चारा सब को साल मुबारक।
जुग-जुग जीवे भारत प्यारा सब को साल मुबारक।
इस की सुन्दर कलगी अन्दर शोभित है कुर्बानी।
नवयुग परिवर्तन की प्रबल लौकिक प्रीत कहानी।
जनवादी नवनीत नज़ारा सब को साल मुबारक।
जुग-जुग जीवे भारत प्यारा सब को साल मुबारक।
धर्म-कर्म की श्रद्धा होवे परिश्रम भीतर सृजन।
संपूर्णता में उमंगे समतव होवे आर्पण।
झुग्गी-झोंपड बीच नज़ारा सब को साल मुबारक।
जुग-जुग जीवे भारत प्यारा सब को साल मुबारक।
मानवता की ज्योति प्रज्वलित विभन्न शब्दों अन्दर।
पूजा अर्चन बीच सुगंधी होवे अनुपम मंज़र।
मन्दिर मस्जिद एंव गुरूद्धारा सबको साल मुबारक।
जुग-जुग जीवे भारत प्यारा सब को साल मुबारक।
शुभ इच्छाएं शुभआसीसें मालिक सब को देवे।
एक गुलदस्ता, जलते दीपक, थाल में गुड़ एंव मेवे।
बालम गीतों का बंजारा सब को साल मुबारक।
जुग-जुग जीवे भारत प्यारा सब को साल मुबारक।
— बलविंदर बालम
