हास्य व्यंग्य

मोहल्ले का एल ओ पी 

भाई भरोसे लाल हमारे मोहल्ले के नामी आदमी है। नामी इस लिए हैं कि उन्हें बस नाम से मतलब  चाहे जैसे भी हो। इस के आलावा भी उन की कई विशेषताएं हैं। जिन  मोहल्ले में उन का नाम है। और मोहल्ले  में ही नहीं दूर दूर तक उन की रिश्तेदारियों में भी उन का बड़ा नाम है। आप कहेंगे यह बात मुझे कैसे पता है। तो आप को बता दूँ कि वे मेरे बचपन के मित्र हैं और अभी तक भी मित्र हैं। आज के समय में यह क्या कम बड़ी बात है। 

पर यदि आप को मुझ से पूछना ही है तो यह पूछें कि उन के नामी होने के क्या कारण हैं तो मैं बताऊं कि उन की क्या २ विशेषतायें हैं जिन से उन से उन का पूरे मोहल्ले में नाम है। क्योंकि नाम होना छोटी बात नहीं है। किसी का नाम ऐसे ही नहीं हो जाता है और उन्होंने तो कोई चुनाव भी नहीं लड़ा है जिंदगी में कि आप कहें कि इसी लिए उन्हें सब जानते होंगे। पर मैं  बता दूँ कि वे तो चुनाव लड़ना चाहते थे पर मैंने ही अपना मित्र धर्म निभाते हुए उन्हें चुनाव नहीं लड़ने दिया। 

पर आप को यह भी बता ही दूँ कि ु के चुनाव न लड़ने का कारण अकेले मैं ही नहीं हूँ यह तो मैं वैसे ही कह रहा हूँ क्योंकि हर आदमी चाहता है कि जब कोई भला काम हो तो उस का श्रेय उसे ही मिले। मैं तो बस इसी लिए कह रहा हूँ कपर ऐसा है नहीं क्योंकि यदि वे चुनाव लड़ने की ठान ही लेते तो भला मैं उन्हें कैसे रोकता। आप ही बताइये क्या यह सम्भव है कि चुनाव लड़ना चाहें तो क्या दूसरा कोई उसे रोक सकता है शायद बिलकुल भी नहीं। पर असली कारण तो उन का फक्क़ड़नाथ होना था क्योंकि चुनाव लड़ना कोई हंसीखेल तो है नहीं लाखों नहीं अब तो करोड़ो लगाने पड़ते हैं। पर उन के पास तो लाखों क्या हजारों में भी पूँजी नहीं थी ,दूसरे उन की बीबी और बच्चे भी अड़ गए कि चर में चाहे कुछ भी हो जाये पर आप को चुनाव नहीं लड़ने देंगे। तब जा कर उन के तेवर ढीले पड़े नहीं तो क्या पता वे आप मोदी जी की कुर्सी पर होते या क्या पता शाह की कुर्सी पर विराजते। पर वे तो पार्षद  की कुर्सी तक भी नहीं पहुँच सके। मुझे और मेरे मित्र को इस बात का बहुत ही दुःख है। 

पर कोई बात नहीं उन का मोहल्ले में नाम तो अब भी कम नहीं है। मोहल्ले का बच्चा बच्चा ही नहीं बड़े से बड़ा भी उन के नाम से अच्छी तरह  परिचित  है। इस का कारण  भी बड़ा मजेदार है जिस  सब जानते हैं क्योंकि वे  हमारे मोहल्ले के एलओपी हैं। या कहूँ कि उस से भी बड़े हैं या अपने कारनामों में उस से भी ज्यादा है। जैसे वे अपने ही मोहल्ले के हमेशा खिलाफ ही रहते हैं। उन्हें मोहल्ले से कोई मतलब नहीं है।  कुछ न कुछ काम ऐसा करना जिस में उन की पूरी अक्लमंदी का सब को पता चल जाये। चाहे वह काम पूरे मोहल्ले के खिलाफ ही क्यों न हो। पर वे तो अपने आप को मोहल्ले का एल ओ पी जो मानते हैं। 

चलो एक यही बात थोड़ी हैं उन के की हर बात ही पूरी एल ओ पी वाली है। वे दूसरे मोहल्ले में में जा कर भी अपने ही मोहल्ले की बुराई करने से भी कभी बाज नहीं आते हैं क्योंकि वे तो एल ओ पी जो ठहरे। इसलिए वे समझते हैं कि मैं तो कुछ भी कर सकता हूँ या जो करता हूँ वो ही सही है। पर उन्हें कौन समझाये कि भाई यह बात ठीक नहीं है। इतना ही नहीं वे दूसरी जगह जा कर वहां के युवकों से  भी उल्टी सीधी बाते करते हैं जिन का कोई न तो सिर होता है और न ही पैर होते हैं। पर क्योंकि वे एल ओ पी हैं तो उन के घरवाले भी उन की ही बात का समर्थन करने लगते हैं। पता नहीं क्यों उन्हें समझ नहीं आता कि ये बातें उन्हें शोभा नहीं देतीं हैं। 

हुए सुनों एक बार  दूसरे मोहल्ले के किसी  बड़ा नेता  ने सब को मिलने कल लिए बुलाया। उस नेता को भी इन एल ओ पी की बहुत सारी  खूबियां पता थीं तो उस ने इसी कारण से इसे नहीं बुलाया कि पता नहीं यह मोहल्ले में जा कर पता नहीं क्या २ कह देगा और सब को बताएगा मेरे नेता जी ने मेरे कान में यह बात बताई है और उन्होंने इस से चाहे बात भी न की हो तो भी यह कुछ भी कह सकता है। और बिन बात की बात का बखेड़ा खड़ा कर देगा। यह सोच कर ही उन्होंने इसे बुलाया। 

बस फिर क्या था इस ने और इस की फैमली ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया कि मोहल्ले वाले हमें मिलने से रोक रहे हैं। अब इन से कोई यह पूछे कि भला मोहल्ले वाले इन्हें  मिलने से क्यों रोकते। वे भला इसे कैसे रोक सकते हैं। जब नेता जी इसे बुलाते तो भला मोहल्ले वालों का क्या अधिकार है जो इसे रोक लेते। पर उस नेता ने तो इसे मिलने के लिए बुलाया ही नहीं और यह बदनाम करने लगा मोहल्ले वालों को कि ये नहीं मिलने देना छह रहे हैं। इस लिए मुझे नहीं बुलाया। पर मोहल्ले वालों को भी तो इस के कारनामों का पता है कि यह तो हमेशा ही ऐसी उलटी सीधी बातें ही करता है। 

भौंकने दो इसे इस के भौंकने से क्या होता है। इस की काबिलियत तो सब जानते हैं केवल मोहल्ले वाले ही नहीं दूर तक इस कि असलियत से परिचित हैं।अब यह बिना बात भौंकता है भौंकने दो। अक्ल इस में दो कोड़ी की नहीं है पर बना हुआ मोहल्ले का एल ओ पी है। 

— डॉ. वेद व्यथित 

डॉ. वेद व्यथित

ख्यात नाम : डॉ. वेद व्यथित नाम : वेद प्रकाश शर्मा जन्म तिथि : अप्रैल 9,1956 शिक्षा : एम्० ए० (हिंदी ),पी एच ० डी० शोध का विषय "नागार्जुन के साहित्य में राजनीतिक चेतना मेरठ विश्व विद्यालय मेरठ वर्तमान पता : अनुकम्पा -1577 सेक्टर -3 ,फरीदाबाद -121004 फोन नम्बर : 0129-2302834 , 09868842688 ईमेल : dr.vedvyathit@gmail.com Blog : http://sahiytasrajakved.blogspot.com सम्प्रति : अध्यक्ष - भारतीय साहित्यकार संघ (पंजी ) संयोजक - सामाजिक न्याय मंच (पंजी) उपाध्यक्ष - हम कलम साहित्यिक संस्था (पंजी ) शोध सहायक - अंतर्राष्ट्रीय पुनर्जन्म एवं मृत्योपरांत जीवन शोध केंद्र इंदौर ,भारत परामर्श दाता - समवेत सुमन ग्रन्थ माला सलाहकार - हिमालय और हिंदुस्तान विशेष प्रतिनिधि - कल्पान्त सम्पादकीय परामर्श - ब्रह्म चेतना सम्पादकीय सलाहकार - लोक पुकार साप्ताहिक पत्र संस्थापक सदस्य - अखिल भारतीय साहित्य परिषद ,हरियाणा प्रान्त पूर्व सम्पादक - चरू (साहित्यिक पत्र ) पूर्व प्रांतीय सन्गठन मंत्री - अखिल भारतीय साहित्य परिषद परामर्श दाता : www.mohantimes .com (इ पत्रिका ) जापानी हिंदी कवि सम्मेलनों में सहभागिता अनुवाद : जापानी,रुसी ,फ्रेंच , नेपाली तथा पंजाबी भाषा में रचनाओं का अनुवाद हो चुका है प्रकाशन : मधुरिमा (काव्य नाटक ) १९८४ आखिर वह क्या करे (उपन्यास )१९९६ बीत गये वे पल (संस्मरण )२००२ आधुनिक हिंदी साहित्य में नागार्जुन (आलोचना )२००७ भारत में जातीय साम्प्रदायिकता (उपन्यास )२००८ अंतर्मन (काव्य संकलन )२००९ न्याय याचना (खंड काव्य ) 2011 साहित्य पर शोध : 'बीत गए वो पल' संस्मरण में सामाजिक चेतना कुरुक्षेत्र विश्व विद्यालय कुरुक्षेत्र 'आखिर वह क्या करे ' उपन्यास में अन्तर्द्वन्द की अवधारणा विनायक मिशन्स विश्व विद्यालय तमिल नाडू 'भारत में जातीय साम्प्रदायिकता ' उपन्यास में सामाजिक बोध krukshetr विश्व विद्यालय 'मधुरिमा' काव्य नाटक पर शोध कुरुक्षेत्र विश्व विद्यालय नवीन सर्जन : * "व्यक्ति चित्र " नामक नवीं विधा का सर्जन किया है * "त्रि पदी" काव्य की नई विधा का सर्जन किया है अन्य *कुरुक्षेत्र विश्व विद्यालय में आयोजित एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में अंतिम सत्र की अध्यक्षता * शताधिक साहित्यिक समारोह व गोष्ठियों की अध्यक्षता की है अंर्तजाल (Internet) पर प्रकाशित विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशन : www.pravasiduniya.com www.sahityashilpi.com www.p4poetry.com http://sakhikabira.blogspot.com http://aakhrkalsh.blogspot.com http://blog4varta.blogspot.com http://utsahi.blogspot.com www.chrchamnch.com www.janokti.com www.srijangatha.com www.khabarindya.com etc. सम्मान : साहित्य सर्जन के लिए "समाज गौरव "सम्मान भारतीय साहित्यकार संसद द्वारा "मोहन राकेश शिखिर सम्मान पत्रकार विश्व बन्धु सम्मान युवा कार्यक्रम एनम खेल मंत्रालय भारत सरकार द्वारा सम्मान हिमालय और हिंदुस्तान एवार्ड हरियाणा सरकार द्वारा आपात काल के विरुद्ध किये संघर्ष के लिए ताम्र पत्र से सम्मानित विभिन्न विधाओं में निरंतर लेखन....