मुस्कुराहट
हर वक़्त चेहरे पर
नज़र क्यों आतीं यह तल्खियां
जाने मन कभी तो मुस्कुराइए
देखना चाहते हैं हम
मुस्कुराता वही चेहरा
जिस पर फ़िदा हो
मर मिटे थे हम
चिलमन हटाकर
तिरछी नज़र देख फिर यूँ मुस्कुराना
विना वार तुम्हारा यों घायल कर देना
माना यह बात पुरानी है
लेकिन समाई याद दिल में अभी बाकी है
न वो तुम रहे
न वह बात हममें रही
फिर भी मुस्कुराकर जी लें
जिंदगी बाकी जितनी भी है
