श्रोता संस्कृति का एक हिस्सा बनें हम
शब्दों की सरिता
धीरे-धीरे बहती हुई
मन को सींचे
सुनने के क्षण में
दूसरों का धड़कन-सत्य
धीमे प्रकट हो
वाणी के पीछे
छिपी हुई भावनाएँ
कान पहचानें
थमे हुए पल में
किसी का दर्द सुनना
मानवता का धर्म
धूप की रेखा
खिड़की पर टिककर बोले
धीरज अपनाओ
सन्नाटे में भी
किसी की मौन कहानी
फूल-सी महके
तितली के पंख
हवा से कहें संदेश
सुनना भी दान
बूँदों की फुसफुस
धरती तक पहुँचकर कहे
सबके स्वर सुनो
सागर की लहरें
एक-दूसरे को सुनकर
तालमेल रचें
सुनने की संस्कृति
दिलों के बीच पुल बनकर
बंधन मजबूत करे
श्रोता बन जाएँ
तो रिश्तों के आईने
साफ़ झिलमिलाएँ
श्रोता संस्कृति का
एक हिस्सा बनें हम
यही सार्थकता
— डॉ. अशोक
