गीतिका/ग़ज़ल

अफसाने

पत्थर होकर भी फूलों से घायल होते हैं
प्यार में अक्सर लड़के ही पागल होते हैं

न जाने क्यूं कोसते हैं लोग क़िस्मत को
लोग अक्सर अपनी खुशियों के खुद क़ातिल होते हैं

देखा है मैंने वफादारों को अक्सर तन्हा
बेवफ़ा अक्सर महफिलों में शामिल होते हैं

हारकर लोग बैठ जाते हैं अक्सर रास्तों में
मगर रास्ते कब किसी की मंज़िल होते हैं

जो दरिया अक्सर हो जाते हैं बेकाबू
उन दरियाओं को कब साहिल मिले होते हैं

लोग तलाशते हैं खुशियां प्यार में
मगर उनको अक्सर गम हासिल होते हैं

प्यार में दिल नहीं लोग टूटते हैं
प्यार में जो टूटते हैं वो कब दिल होते हैं

इंसान मरते वक्त कुछ नहीं ले जाता साथ
न जाने फिर क्यूं सफल अक्सर श्मशान होते हैं

लोगो को अगर ऐतबार हो भगवान पे हर हाल में
मुश्किल से मुश्किल दिन भी कब मुश्किल होते हैं

मत लिखो अफसाना प्यार का
ये प्यार के अफसाने कब पूरे होते हैं

— हेमंत सिंह कुशवाह

हेमंत सिंह कुशवाह

राज्य प्रभारी मध्यप्रदेश विकलांग बल मोबा. 9074481685