एक हाथ से ताली भला कहां बजा करती है
पारस्परिक विचार- विमर्श से ही
सम्बन्धों की प्रगाढ़ता बढ़ती है
वर्ना आप ही बताओ एक हाथ से
क्या ताली कभी भी बजती है।।
कितनी भी व्यस्तता क्यूं न हो
थोड़ा समय निकालना ही पड़ेगा
कभी-कभी मित्रों, रिश्तेदारों से
मिलने का कार्यक्रम बनाना पड़ेगा
बात करने या मिलने-जुलने से ही
उलझी हुई गुत्थी सुलझती है
वर्ना आप ही बताओ एक हाथ से
क्या ताली कभी भी बजती है।।
भागम -भाग भरे इस जीवन में
खुद की सुधि लेने का समय नही
जनकल्याण की तो बात ही छोड़ो
निज सेहत तक की फ़िक्र नही।
ज्यादा दिन जो की लापरवाही
तो ज़िन्दगी हाथ से फिसलती है
वर्ना आप ही बताओ एक हाथ से
क्या ताली कभी भी बजती है।।
अक्सर बड़ी समस्या के मूल में
छोटे कारण बड़ी भूमिका निभाते
समय रहते जब ध्यान न देते
विकराल रूप वे धारण कर जाते
अहं की व्यर्थ- पूर्ण टकराहट से
तनाव व परेशानी बढ़ती है
वर्ना आप ही बताओ एक हाथ से
क्या ताली कभी भी बजती है।।
यूं तो वार्तालाप से हर समस्या का
हल निकाला जा सकता है
पर कभी-कभी शांत रह कर भी
विपदा को टाला जा सकता है ।
थोड़ा बुद्धिमानी का परिचय देकर
बिगड़ी बात संभाली जा सकती है
वर्ना आप ही बताओ एक हाथ से
क्या ताली कभी भी बजती है।।
शांत चित्त, सद विचारों से अपना
आज व कल सुधार सकते हैं
थोड़ा व्यर्थ के विवादों से बचकर
आवश्यक समय निकाल सकते हैं
सकारात्मक सोच धारण करने से
ज़िन्दगी और भी निखरती है
वर्ना आप ही बताओ एक हाथ से
क्या ताली कभी भी बजती है।।
सकारात्मक सोच धारण करने से
ज़िन्दगी और भी निखरती है
वर्ना आप ही बताओ एक हाथ से
क्या ताली कभी भी बजती है।।
— नवल अग्रवाल
