गीत/नवगीत

पत्थर हूँ मैं

इंसान नज़र आता बंजर हूँ मैं
ठोकरों से देखो बना पत्थर हूँ मैं

टूटे एहसास,टूटे ख्वाब-ख्वाहिशें
मेरी खुशियों के महल , इमारतें
तिरस्कार पाता शामों सहर हूँ मैं
ठोकरों से देखो………..

ज़रुरत के रिश्ते, अपनों का स्वार्थ
टूटा पल-पल विश्वास,मिला आघात
झेलता अपनों, गैरों का कहर हूँ मैं
ठोकरों से देखो……..

जब तक चलता रहा अच्छा था मैं
धन-दौलत लुटाता तब अपना था मैं
बदसूरत हुआ कहते वो बद्तर हूँ मैं
ठोकरों से देखो…….

मजबूर नैन ख़ामोशी से अपमान सहा
मैं अस्वस्थ अब झुक गया न खड़ा रहा
सारे ताने, कड़वाहटों का असर हूँ मैं
ठोकरों से देखो…….

— कामनी गुप्ता

कामनी गुप्ता

माता जी का नाम - स्व.रानी गुप्ता पिता जी का नाम - श्री सुभाष चन्द्र गुप्ता जन्म स्थान - जम्मू पढ़ाई - M.sc. in mathematics अभी तक भाषा सहोदरी सोपान -2 का साँझा संग्रह से लेखन की शुरूआत की है |अभी और अच्छा कर पाऊँ इसके लिए प्रयासरत रहूंगी |