बाल कविता

वीर बालक – फतेहसिंह, ज़ोरावर सिंह

माता गुजरी की गोद में,
पले वीर दो लाल,
नाम फतेह सिंह,जोरावर,
थे साहस की मिसाल।।

नन्ही उम्र, ऊँचा हौसला,
सच का था आधार,
झुके नहीं, डरे नहीं,
जब आया अंधकार।।

पिता थे गुरु गोविंद सिंह महान,
धर्म-वीरता के स्वर,
उनके संस्कारों से चमका,
इन बालों का हर कण-घर।।

ईंटों में चुनवाए गए,
पर टूटा न विश्वास,
इतिहास बना बलिदान से,
अमर हुआ प्रकाश।।

फतेह सिंह, जोरावर,
वीरता की पहचान,
वीर बाल दिवस सिखाता—
हिम्मत से बनता इंसान।।

— गोपाल कौशल भोजवाल

गोपाल कौशल "भोजवाल"

नागदा जिला धार मध्यप्रदेश 99814-67300