1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर भारतीय सेना की निर्णायक जीत का स्मरण,
26 दिसंबर भारतीय इतिहास में 1971 युद्ध के सफल समापन का प्रतीक है, जब पूर्वी पाकिस्तान में युद्धविराम की घोषणा हुई और बांग्लादेश की स्वतंत्रता पक्की हो गई। हालांकि भारत सरकार ने आधिकारिक विजय दिवस 16 दिसंबर को घोषित किया,जिस दिन ढाका में 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों का आत्मसमर्पण हुआ 26 दिसंबर उस विजय की पूर्णता और शांति स्थापना की स्मृति का दिन है। यह तिथि सैन्य नायकों की वीरता के साथ मानवीयता का संदेश भी देती है।ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बांग्लादेश मुक्ति का चरम1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना की क्रूरता के खिलाफ जन-विद्रोह से प्रारंभ हुआ। लाखों शरणार्थियों के संकट ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को हस्तक्षेप के लिए प्रेरित किया। 3 दिसंबर को पाकिस्तानी हमले के बाद भारतीय सेना ने 13 दिनों में अभूतपूर्व सफलता हासिल की। 16 दिसंबर को लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा ने लेफ्टिनेंट जनरल ए.ए.के. नियाजी का आत्मसमर्पण स्वीकार किया, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य आत्मसमर्पण था। 26 दिसंबर को युद्ध की औपचारिक समाप्ति घोषित हुई, जिसने भारत की सैन्य व कूटनीतिक श्रेष्ठता स्थापित की।इस घटना ने न केवल बांग्लादेश को जन्म दिया, बल्कि संयुक्त राष्ट्र में भी भारत की भूमिका को सम्मान दिलाया।26 दिसंबर का विशेष महत्वआधिकारिक विजय दिवस 16 दिसंबर को फोर्ट विलियम (कोलकाता) और विजय चौक (दिल्ली) पर मनाया जाता है, लेकिन 26 दिसंबर कई सैन्य इकाइयों, स्कूलों और सांस्कृतिक मंचों पर आत्मसमर्पण की सटीक स्मृति के रूप में स्मरण किया जाता है। भारतीय सेना ने युद्धोत्तर बांग्लादेश में सहायता प्रदान की, जो शांति की मिसाल है। परमवीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल और अन्य नायकों की गाथाएं युवाओं को देशभक्ति सिखाती हैं।
26 दिसंबर हमें सतर्कता, शांति और राष्ट्र निर्माण का संकल्प दिलाता है। उन वीरों को नमन, जिन्होंने ‘विजय है’ का उद्घोष किया,भारत माता की जय!
— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़
