हृदय अटल विश्वास भरा

जो कल थे वे आज नहीं है,आनी है सबकी बारी ।
हम भी काम करे कुछ ऐसे, याद करें दुनिया सारी ।।
हृदय-हृदय में भाव भरें है, कण्ठ-कण्ठ में राग भरा ।
भारत माँ के इस सपूत के, हृदय अटल विश्वास भरा।।
विपदाओं से कब घबराएं, कदम बढ़ाना नही टला ।
विपरीत हवा में चलकर भी, गये किनारे नाव चला ।।
वक्त ठहरता नहीं कभी भी, खत्म करें जीवन पारी ।
हम भी काम करे कुछ ऐसे, याद करें दुनिया सारी ।।
शाम ढले से पहले कोई, काम अधूरा क्यों रखना ।
टालें से जब मौत न टलती, स्वप्न करों पूरा अपना ।।
रार न ठानें कभी किसी से, हार नहीं स्वीकार कभी ।
इच्छा शक्ति प्रबल जो रखते, करें परीक्षा पार सभी ।।
शाम ढले जब सूरज छिपता, तभी अँधेरा हो भारी ।।
हम भी काम करे कुछ ऐसे, याद करें दुनिया सारी ।।
कल कल करते आज हाथ से,बीत न जाये ये जीवन।
काम किया क्या ऐसा कोई, पूछ रहा यह अंतर्मन ।।
कहे मौत से अटल सरीखा, कल ले जाना मुझे कहीं ।
आजादी उत्सव दिन झंडा, झुक जाए मंजूर नहीं ।।
आँधी में भी दियें जलाये, करें मौत से वह यारी ।
हम भी काम करे कुछ ऐसे, याद करें दुनिया सारी ।।
— लक्ष्मण लड़ीवाला ‘रामानुज’
