गीत/नवगीत

हृदय अटल विश्वास भरा

जो कल थे वे आज नहीं है,आनी है सबकी बारी ।
हम भी काम करे कुछ ऐसे, याद करें दुनिया सारी ।।

हृदय-हृदय में भाव भरें है, कण्ठ-कण्ठ में राग भरा ।
भारत माँ के इस सपूत के, हृदय अटल विश्वास भरा।।
विपदाओं से कब घबराएं, कदम बढ़ाना नही टला ।
विपरीत हवा में चलकर भी, गये किनारे नाव चला ।।
वक्त ठहरता नहीं कभी भी, खत्म करें जीवन पारी ।
हम भी काम करे कुछ ऐसे, याद करें दुनिया सारी ।।

शाम ढले से पहले कोई, काम अधूरा क्यों रखना ।
टालें से जब मौत न टलती, स्वप्न करों पूरा अपना ।।
रार न ठानें कभी किसी से, हार नहीं स्वीकार कभी ।
इच्छा शक्ति प्रबल जो रखते, करें परीक्षा पार सभी ।।
शाम ढले जब सूरज छिपता, तभी अँधेरा हो भारी ।।
हम भी काम करे कुछ ऐसे, याद करें दुनिया सारी ।।

कल कल करते आज हाथ से,बीत न जाये ये जीवन।
काम किया क्या ऐसा कोई, पूछ रहा यह अंतर्मन ।।
कहे मौत से अटल सरीखा, कल ले जाना मुझे कहीं ।
आजादी उत्सव दिन झंडा, झुक जाए मंजूर नहीं ।।
आँधी में भी दियें जलाये, करें मौत से वह यारी ।
हम भी काम करे कुछ ऐसे, याद करें दुनिया सारी ।।

— लक्ष्मण लड़ीवाला ‘रामानुज’

लक्ष्मण रामानुज लड़ीवाला

जयपुर में 19 -11-1945 जन्म, एम् कॉम, DCWA, कंपनी सचिव (inter) तक शिक्षा अग्रगामी (मासिक),का सह-सम्पादक (1975 से 1978), निराला समाज (त्रैमासिक) 1978 से 1990 तक बाबूजी का भारत मित्र, नव्या, अखंड भारत(त्रैमासिक), साहित्य रागिनी, राजस्थान पत्रिका (दैनिक) आदि पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित, ओपन बुक्स ऑन लाइन, कविता लोक, आदि वेब मंचों द्वारा सामानित साहत्य - दोहे, कुण्डलिया छंद, गीत, कविताए, कहानिया और लघु कथाओं का अनवरत लेखन email- lpladiwala@gmail.com पता - कृष्णा साकेत, 165, गंगोत्री नगर, गोपालपूरा, टोंक रोड, जयपुर -302018 (राजस्थान)