कविता

नया साल 2026 पर

1.नवचेतना का उजास

नई उमंग की धुन सुनाकर, आया है नववर्ष नया,
नई सुबह ने कह दिया, बीता कल अब हुआ पराया,
नई किरणें आँगन उतरीं, अंधियारा को दूर भगाने,
नई रोशनी ने सिखला दिया, खुद पर भरोसा जगाने।

नई ऊर्जा बहने लगी है, शिथिल नसों के बीच,
नया उत्साह हर मन बोले, हार मानना नहीं ठीक,
नई आशा की डोर पकड़कर, कदम फिर आगे बढ़ते,
नया संकल्प हर कठिनाई से, डटकर सामना करते।

नई बहार ने द्वार खटखटाया, सूने दिलों के गाँव,
नई खुशबू फैल गई है, जीवन के हर एक ठाँव,
नया फूल काँटों में रहकर, मुस्काना सिखलाता,
नई कली धीमे से कहती, समय सब बदल जाता।

नये रंग सपनों के बनकर, मन के कैनवास सजाते,
नये विचार दीप बनकर, अज्ञान तिमिर मिटाते,
नये सपने पंख लगाकर, खुले गगन में उड़ते,
नयी उड़ान के साथ युवा, ऊँचे लक्ष्य को छूते।

नया आकाश बाहें फैलाए, सबको गले लगाने,
नया सूरज रोज़ सिखाए, फिर से आगे बढ़ जाने,
नया साहस डर को तोड़े, मन को मजबूत करे,
नया आत्मबल हर इंसान को, भीतर से समृद्ध करे।

नया साल नई सीख दे, बीते कल की भूलों से,
नई नीति जीवन सँवारे, सच्चे और शुभ मूल्यों से,
नई बात हो वाणी में, मधुरता और सम्मान,
नई सोच से बदले दुनिया, बने मानव का पहचान।

नई तकनीकी प्रगति लाए, पर संस्कार न छूटें,
नया विज्ञान सेवा सिखाए, अहंकार न टूटे,
नया ज्ञान दीपक बन जाए, अंधविश्वास को हराए,
नई दिशा ऐसा पथ दिखाए, जहाँ सत्य साथ जाए।

नये रिश्ते विश्वास बनें, स्वार्थ कहीं न ठहरे,
नयी हँसी हर चेहरे पर, आँसू कहीं न अब बहें,
नया अपनापन दिल में हो, भेदभाव मिट जाए,
नया प्रेम हर मन में बसकर, दुनिया जोड़ जाए।

नये वादे खुद से करें, ईमान और सत्य कर्म के,
नया परिश्रम दिन-रात बने, उज्ज्वल हर भविष्य के,
नयी शुरुआत हर सुबह हो, बीती चिंता छोड़,
नया रास्ता खुद बन जाए, हिम्मत का हाथ जोड़।

नया धैर्य संकट में साथ दे, टूटने न पाए,
नया विश्वास खुद पर हो, मंज़िल पास लाए,
नया हौसला हर मन बोले, थकना अब मना है,
नया जोश हर कदम कहे, जीतना ही ठाना है।

नया समय मूल्य सिखाए, हर पल अनमोल है,
नया अवसर द्वार बताए, आज ही सही बोल है,
नया अनुशासन जीवन में, स्थिरता भर जाए,
नया संतुलन सोच-विचार को, सुंदर राह दिखाए।

नया करुणा भाव जगाए, पीड़ा सबकी समझे,
नया सहयोग हाथ बढ़ाए, कोई भी न अकेले झंझे,
नया समाज समरस बने, ऊँच-नीच मिट जाए,
नया भारत, नया विश्व, शांति का गीत अब गाए।

नया प्रभात संदेश सुनाए, समय सदा चलता रहता,
नया अनुभव हर दिन कहे, जो सीखता वही बढ़ता,
नया विश्वास मन में रखो, खुद को कम न आँको,
नया साहस दिल से कहे, सपनों से मुँह न मोड़ो।

नया वर्ष सबको दे दे, सुख, शांति और सम्मान,
हर घर में खुशहाली हो, हर मन में हो मुस्कान,
हर दिन बने उत्सव जैसा, हर पल हो उजियारा,
यही नववर्ष की कामना है, यही संदेश हमारा।

2.नया साल आया

नया साल आया, नया अनमोल उमंग लाया,
सूरज की लाली किरणों ने, नई ऊर्जा छाया।
चिड़ियों ने गाया सुबह-सुबह मीठा-सा तराना,
हर दिल ने फिर से खुश रहना सीखा, मुस्काना।

पुराने ग़मों को अब नई सुबह में दूर भगाएँ,
नई उम्मीदें, नई चाहतें सबको पास बुलाएँ।
हँसते-खेलते सदा आगे बढ़ें, यही हमारी राह,
सपनों की आशा बने जीवन की नई-नई चाह।

नए बस्ते में नए अरमान, नया जोश भर आया,
नए शब्द, नई पहचान, नया ज्ञान लाया।
अब नए साल में किताबों से दोस्ती करेंगे,
हर सवाल का हल हम खुद से ढूँढ़ निकालेंगे।

माँ-पापा की हर बात हम आदर से मानेंगे,
गुरुजन का रखेंगे मान, सम्मान सदा जानेंगे।
सच, मेहनत और अच्छाई का पाठ पढ़ेंगे हम,
यही बनेगी हमारी शान, हमारी संस्कृति का दम।

मिल-जुल कर सबको प्यार बाँटेंगे दिल से,
छोटे-बड़े का मान रखेंगे, हर किसी से हँस के।
नया साल कहता है मुस्काकर हमसे –
“अच्छे बनो, आगे बढ़ो, अपने लक्ष्य को पाओ तुमसे।”

3.नया साल नई मुस्कान

नया साल आया, नई धरा मुस्काई,
ओस की बूँदों में नई धूप नहाई।
नीला गगन, सुबह की हरियाली छाई,
प्रकृति ने फिर खुशियाँ हर ओर लुटाई।

सूरज बोला किरणों संग,
“नए सपनों को तुम पंख लगाओ।”
हवा ने छेड़ा प्रेम का मधुर गीत,
हर मन में स्नेह का दीप जलाओ।

फूलों ने खुशबू बाँटी आज,
भँवरों ने गाया जीवन राग।
नदियों ने बहकर यह समझाया,
चलते रहो सदा, मत करना त्याग।

प्रेम से रिश्ते और सँवरें जीवन के,
हँसी-खुशी से हर दिन निखरें।
छोटे-छोटे पल भी होते अनमोल,
इन्हीं में जीवन के रंग बिखरें।

बीते कल को आज विदा दें हम,
नई शुरुआत को हँसकर गले लगाएँ।
सच, करुणा और आपसी मान बढ़ाएँ,
नया साल यही संदेश सुनाए।

आओ मिलकर वादा करें हम सब,
धरती माँ का मान बढ़ाएँ अब।
प्रकृति, प्रेम और खुशी के संग मिलकर,
नए साल को हर्ष और उल्लास से मनाएँ।

— रूपेश कुमार

रूपेश कुमार

भौतिक विज्ञान छात्र एव युवा साहित्यकार जन्म - 10/05/1991 शिक्षा - स्नाकोतर भौतिकी , इसाई धर्म(डीपलोमा) , ए.डी.सी.ए (कम्युटर),बी.एड(फिजिकल साइंस) वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी ! प्रकाशित पुस्तक ~ *"मेरी कलम रो रही है", "कैसें बताऊँ तुझे", "मेरा भी आसमान नीला होगा", "मैं सड़क का खिलाड़ी हूँ" *(एकल संग्रह) एव अनेकों साझा संग्रह, एक अंग्रेजी मे ! विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओ मे सैकड़ो से अधिक कविता,कहानी,गजल प्रकाशित ! राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थानों से सैकड़ो से अधिक सम्मान प्राप्त ! सदस्य ~ भारतीय ज्ञानपीठ (आजीवन सदस्य) पता ~ ग्राम ~ चैनपुर  पोस्ट -चैनपुर, जिला - सीवान  पिन - 841203 (बिहार) What apps ~ 9934963293 E-mail - - rupeshkumar01991@gmail.com