नन्ही दुनिया
नन्ही नन्ही दुनिया, सपनों की बगिया,
मुस्कानों से भरी, खिलखिलाती हर गली।
तितली के पंख, बादलों की चाल,
हर दिन नया रंग, हर शाम निराली ताल।
मिट्टी की खुशबू, बूँदों की बौछार,
बारिश में छप-छप, हर कदम बेकरार।
कागज़ की कश्ती, नदिया की धार,
बचपन की मस्ती, है सबसे खास उपहार।
सूरज से हो बातें, चंदा संग खेलें,
तारों की चादर ओढ़े, सपनों में झूलें।
रंग-बिरंगे सपने, अनोखी सी पहचान,
छोटी-छोटी ख़ुशियाँ, नन्हें दिल का अरमान।
— डॉ. सत्यवान सौरभ
