सूली पर चढ़ जाता है
देश की रक्षा करने वाला, सूली पर चढ़ जाता है।
धैर्य हिम्मत जिस के अंदर, वह नहीं घबराता है।
बाधाओं से डरे नहीं,फौलादी जिस का है सीना,
फूंक फूंक के कदम रखता वीर शौर्य दिखाता है।
सत्य अहिंसा का पुजारी, भेदभाव को नहीं माने,
फर्ज निभाता देश हित है, वीर वही कहलाता है।
मर्यादा का पालन कर के, धर्म की रक्षा करता है,
सद्गुण होते उसमें सारे भारत जिस की माता है।
बांध कफ़न सरहद पे निकले जान वह लुटाने को,
शहीदों के जब लगते मेले अपना नाम कमाता है।
नमन करूं मैं वीरों को जो जान हथेली पर रखते,
पैनी नजर टिका अपनी ,दुश्मन से नैन लड़ाता है।
पत्नी रोती मात पिता भी,पत्थर दिल पर रख लेते,
पहन वर्दी वीर देश का, सरहद पर जब जाता है।
आज देश को नजर लगी है, भीतर के गद्दारों की,
नोच डालो गर्दन उन की , कैसे यह उठ पाता है।
भूल गया ईमान है अपना जो भारत में पलता है,
छेद करे है उस थाली में जिसका अन्न वो गाता है।
राज गुरु सुखदेव भक्त सिंह, उधम जैसे वीर यहाॅं,
फौलादी हैं सीने जिन के , दुश्मन से टकराता है।
— शिव सन्याल
