गीतिका/ग़ज़ल

सूली पर चढ़ जाता है

देश की रक्षा करने वाला, सूली पर चढ़ जाता है।
धैर्य हिम्मत जिस के अंदर, वह नहीं घबराता है।
बाधाओं से डरे नहीं,फौलादी जिस का है सीना,
फूंक फूंक के कदम रखता वीर शौर्य दिखाता है।
सत्य अहिंसा का पुजारी, भेदभाव को नहीं माने,
फर्ज निभाता देश हित है, वीर वही कहलाता है।
मर्यादा का पालन कर के, धर्म की रक्षा करता है,
सद्गुण होते उसमें सारे भारत जिस की माता है।
बांध कफ़न सरहद पे निकले जान वह लुटाने को,
शहीदों के जब लगते मेले अपना नाम कमाता है।
नमन करूं मैं वीरों को जो जान हथेली पर रखते,
पैनी नजर टिका अपनी ,दुश्मन से नैन लड़ाता है।
पत्नी रोती मात पिता भी,पत्थर दिल पर रख लेते,
पहन वर्दी वीर देश का, सरहद पर जब जाता है।
आज देश को नजर लगी है, भीतर के गद्दारों की,
नोच डालो गर्दन उन की , कैसे यह उठ पाता है।
भूल गया ईमान है अपना जो भारत में पलता है,
छेद करे है उस थाली में जिसका अन्न वो गाता है।
राज गुरु सुखदेव भक्त सिंह, उधम जैसे वीर यहाॅं,
फौलादी हैं सीने जिन के , दुश्मन से टकराता है।

— शिव सन्याल

शिव सन्याल

नाम :- शिव सन्याल (शिव राज सन्याल) जन्म तिथि:- 2/4/1956 माता का नाम :-श्रीमती वीरो देवी पिता का नाम:- श्री राम पाल सन्याल स्थान:- राम निवास मकड़ाहन डा.मकड़ाहन तह.ज्वाली जिला कांगड़ा (हि.प्र) 176023 शिक्षा:- इंजीनियरिंग में डिप्लोमा लोक निर्माण विभाग में सेवाएं दे कर सहायक अभियन्ता के पद से रिटायर्ड। प्रस्तुति:- दो काव्य संग्रह प्रकाशित 1) मन तरंग 2)बोल राम राम रे . 3)बज़्म-ए-हिन्द सांझा काव्य संग्रह संपादक आदरणीय निर्मेश त्यागी जी प्रकाशक वर्तमान अंकुर बी-92 सेक्टर-6-नोएडा।हिन्दी और पहाड़ी में अनेक पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। Email:. Sanyalshivraj@gmail.com M.no. 9418063995

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