कविता

मेरी मातृ भाषा हिंदी

भारत माता के भाल पर जैसे सुशोभित है बिंदी
साहित्य के सौन्दर्य में वैसे हमारी भाषा हिंदी,
सरल सहज , स्वर व्यंजन मात्रा की परिभाषा
जैसे बोली जाये वैसे ही लिखी जाये यह भाषा

इस विशाल देश में हर प्रांत की अपनी एक भाषा
पर संस्कृत से जननी सबमे अग्रणीय हिंदी भाषा
पूरे देश में जानी जाती है हिंदी ,एक संपर्क भाषा
हिंदी का ज्ञान रखने पर कभी होती नहीं निराशा

हिंदी भाषा में संजोया गया है साहित्य का खज़ाना ,
जिसे पढ़ कर सभ्य रूप में में उपजा है यह ज़माना
अंग्रेज़ी भी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है, अवश्य सीख लीजिये,
पर हिंदी भाषा सर्वोच्य है, यह अवश्य जान लीजिये ,

हिंदी बोले तो शुद्ध बोले,मिलावटी शब्दों से रहें दूर,
अपने ज्ञान का परिचय दे ,न समझे खुद को मज़बूर,
देवनागरी हिंदी की लिपि है ,इस से है हमारी पहचान
हिंदी भाषा का हम सब ने मिलकर करना है सम्मान .

सारे विश्व ने हमारी हिंदी भाषा को सही पहचाना है,
हिंदी धर्म ग्रंथों में छिपा अथाह ज्ञान का खज़ाना है,
हिंदी भाषा मार्गदर्शक है, उन्नति का है स्रोत्र विशाल,
हिंदी का अध्धयन करके , हो जाओ ज्ञानी बेमिसाल

— जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया जन्म दिन --१४/२/१९४९, टेक्सटाइल इंजीनियर , प्राइवेट कम्पनी में जनरल मेनेजर मो. 9855022670, 9855047845

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