कहां गया बचपन ?
कहां गया वो बचपन?
कपड़े की गेंद से
सतोलिया खेलना ,
खाली माचिस से
रेलगाड़ी बनाना
वो पकड़म – पकड़ाई
घोड़ा जमाल खाई
पीछे देखे मार खाई।
कागज़ की नाव
गली में तैराना
तालाब किनारे बैठ
गुड़िया सिराना ।
वो कंचे, चंगा पे
वो कुश्ती, वो धमाल
ना होमवर्क का ख्याल।
दादी – नानी के घर जाना
वो रूठना, वो मनाना
जग के जंजालों में
फंस गया बचपन
न जाने कहां गया बचपन?
— विकास कुमार शर्मा
