नई परीक्षा रोज
दुखमय है ये जिंदगी ,उसमे सुख तू खोज ,
जीवन के इस सफर में ,नई परीक्षा रोज।
सुख दुख संकट आपदा ,जीवन के सोपान ,
इन पर ही चलके मिले ,जीवन वाला ज्ञान।
भटक रही है जिंदगी ,पाने को कुछ प्यार ,
पर ये मिलती है नगद,मिलती नहीं उधार।
खुशियों से भरपूर हों ,जीवन के हर रंग ,
नेह और विश्वास की ,उड़ती रहे पतंग।
सुबह आ गई जोश से,कर आलस को दूर,
जीवन में उत्साह भर,खुशियो से भरपूर।
— महेंद्र कुमार वर्मा
