सामाजिक

मोबाइल घरेलू खेल को निगल रहा 

मोबाइल ने घरेलू खेल जैसे अष्ट-चंग,पांचा ,पाली पव्वा,राजा-मंत्री,कैरम बोट,आदि खेलों को मोबाइल ने निगल लिया।बच्चें अब इन खेलों से कन्नी काटने लगे है।हाईटेक होते युग में मोबाइल और इंटरनेट ही सहारा बन गए है ।अभिभावकों को भी चाहिए की बच्चों के लिए अपनी भाग दौड़ भरी व्यस्तम जिंदगी से कुछ समय बच्चों के साथ भी घूमने हेतु निकाले ताकि मोबाइल के गेम से बच्चें दूर रहकर अपनी फिटनेश पर ध्यान दे सकें। बच्चों के साथ बड़ो को भीमोबाइल की लत पड़ गई।अब ऐसा लगने  बच्चे शारीरिक बौद्धिक विकास के साथ  खिलौने की दुनिया ही भूल गए।खिलौनों का व्यापार भी इससे प्रभावित हुआ।कुल मिला कर शारीरिक बौद्धिक गतिविधि कमजोर हो गई।मोबाइल के आभासी दुनिया ने बच्चों को चश्में चढ़वा दिए|कहने का मतलब है कि दिन औऱ रात मोबाइल मे ही लगे रहते है।यदि घर पर मेहमान आते वो आपसे कुछ कह रहे।मगर लोगों का ध्यान बस फेसबुक, व्हाट्सएप पर जवाब देने  में और उनकी समझाइश में ही बीत जाता।मेहमान भी रूखेपन से व्यवहार में जल्द उठने की सोचते है।घर के काम तो पिछड़ ही रहे।फेसबुक,वाट्सअप का चस्का ऐसा की यदि रोजाना सुबह शाम आपने राम राम या गुड़ मोर्निंग नही की तो नाराजगी।बच्चों को ज्ञानार्जन में उपयोगी हेतु ,गीत संगीत,व्यायाम,,खेल आदि पर ध्यान देना होगा।बजाए मोबाइल पर ही लगे रहने के।

— संजय वर्मा “दृष्टि”

*संजय वर्मा 'दृष्टि'

पूरा नाम:- संजय वर्मा "दॄष्टि " 2-पिता का नाम:- श्री शांतीलालजी वर्मा 3-वर्तमान/स्थायी पता "-125 शहीद भगत सिंग मार्ग मनावर जिला -धार ( म प्र ) 454446 4-फोन नं/वाटस एप नं/ई मेल:- 07294 233656 /9893070756 /antriksh.sanjay@gmail.com 5-शिक्षा/जन्म तिथि- आय टी आय / 2-5-1962 (उज्जैन ) 6-व्यवसाय:- ड़ी एम (जल संसाधन विभाग ) 7-प्रकाशन विवरण .प्रकाशन - देश -विदेश की विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं में रचनाएँ व् समाचार पत्रों में निरंतर रचनाओं और पत्र का प्रकाशन ,प्रकाशित काव्य कृति "दरवाजे पर दस्तक " खट्टे मीठे रिश्ते उपन्यास कनाडा -अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व के 65 रचनाकारों में लेखनीयता में सहभागिता भारत की और से सम्मान-2015 /अनेक साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित -संस्थाओं से सम्बद्धता ):-शब्दप्रवाह उज्जैन ,यशधारा - धार, लघूकथा संस्था जबलपुर में उप संपादक -काव्य मंच/आकाशवाणी/ पर काव्य पाठ :-शगुन काव्य मंच