मुक्तक/दोहा

जंगल में कोहराम

आते हैं वो रात में, जेसीबी के साथ |
पूरा जंगल काटते,दिखे सैंकड़ो हाथ ||

तेज गति से रात में, मचा रहे कोहराम |
जंगल वासी भाग कर, कहें बचाओ धाम ||

कौन सुनेगा अब भला, जीवो की आवाज |
कितने संकटग्रस्त हैं, क्या कुछ है अंदाज ||

जीवो का दुख जान ले, मानव तू इक बार |
पीड़ा अपने मन जगा,फिर कर उनसे प्यार ||

— शालिनी शर्मा

शालिनी शर्मा

पिता का नाम-स्वर्गीय मथुरा प्रसाद दीक्षित माता का नाम -श्रीमती ममता दीक्षित पति का नाम-श्री अनिल कुमार शर्मा वर्तमान स्थायी पता- केऐ-16 कर्पूरी पुरम गाजियाबाद फोन न0- 9871631138 जन्म एंव जन्म स्थान-09.04.1969, परीक्षित गढ़ गाजियाबाद उप्र शिक्षा एवं व्यवसाय-बीएससी बीएड़,अध्यापिका व सहायक NCC आफिसर (13 यूपी गर्ल्स बटालियन) प्रकाशित रचनाएं एवं विवरण-अमर उजाला काव्य में 48 रचनायें प्रकाशित, विभिन्न पत्रिकाओं में रोज रजनाएं प्रकाशित होती हैं,दो तीन सम्मान प्राप्त