जंगल में कोहराम
आते हैं वो रात में, जेसीबी के साथ |
पूरा जंगल काटते,दिखे सैंकड़ो हाथ ||
तेज गति से रात में, मचा रहे कोहराम |
जंगल वासी भाग कर, कहें बचाओ धाम ||
कौन सुनेगा अब भला, जीवो की आवाज |
कितने संकटग्रस्त हैं, क्या कुछ है अंदाज ||
जीवो का दुख जान ले, मानव तू इक बार |
पीड़ा अपने मन जगा,फिर कर उनसे प्यार ||
— शालिनी शर्मा
