कविता

संविधान बचाओ रैली

संविधान बचाओ रैली में
बातों और विचारों का आदान प्रदान होने लगा,
उत्तेजना दिला सबके मन में
अराजकता का बीज बोने लगा,
खूब होने लगी लड़ाई,
बढ़ गई जबरदस्त मार पिटाई,
खाक होने लगी सार्वजनिक संपत्तियां आग जलने लगा,
इस तरह संविधान बचाने की जबरदस्त लहर चलने लगा,
लोग संविधान की महत्ता बताने लगे,
दिलों में जोश व जुनून मंडराने लगे,
सब एक दूसरे को बेहतरीन तरीके से भड़काने लगे,
खड़गसिंह बन सभी खिड़कियां खड़खड़ाने लगे,
अब तो सच में संविधानवादी डर जाने लगे,
सत्ता व विपक्ष की हरकतों से घबराने लगे,
टूटने लगे नैतिकता के धागे,
सभी अब खड़े थे लड़ने एक दूसरे के आगे,
अब तो संविधान बचाते बचाते
सब एक दूसरे से दूर जाने लगे,
प्रयास इतना तेज था कि
वतन की नयन से अश्क बह जाने लगे,
तो ऐ मौकापरस्तों इस कदर भी संविधान न बचाओ,
और संविधान की मूल भावना को
रौंद-रौंद न आगे बढ़ जाओ।

— राजेन्द्र लाहिरी

राजेन्द्र लाहिरी

पामगढ़, जिला जांजगीर चाम्पा, छ. ग.495554